कानपुर में गलन भरी ठंड ने स्वास्थ्य पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। दिल और दिमाग दोनों पर ठंड का असर साफ दिख रहा है। ब्लड प्रेशर की दवा में लापरवाही और लक्षणों को नजरअंदाज करने से मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ रहे हैं। सोमवार को कार्डियोलॉजी में हार्ट अटैक के लक्षण वाले 60 मरीज भर्ती हुए, जबकि हैलट अस्पताल में 15 ब्रेन स्ट्रोक के मरीज आए, जिनमें 13 की मस्तिष्क की नसें फटने (ब्रेन हेमरेज) के मामले थे।
एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि ओपीडी में 1133 मरीजों की जांच हुई, 60 भर्ती हुए और 6 मृत अवस्था में लाए गए। हैलट की मेडिसिन इमरजेंसी में 38 मरीज भर्ती हुए, जिनमें 13 ब्रेन हेमरेज और 2 थक्का जमने से स्ट्रोक के थे। एक ब्रेन हेमरेज मरीज मृत अवस्था में पहुंचा। कुल 8 मरीज अस्पताल आने से पहले दम तोड़ चुके थे।
पुराने मरीजों की हालत बिगड़ी मेडिसिन विभाग के प्रो. जेएस कुशवाहा के अनुसार, ओपीडी में 212 मरीज आए। ब्रेन हेमरेज के सबसे ज्यादा मामले हैं। इसके अलावा गुर्दा और लिवर फेलियर के मरीज भी बढ़ रहे हैं। ब्लड प्रेशर बढ़ने से पुराने किडनी मरीजों की हालत खराब हो रही है। एक सीओपीडी मरीज की मौत हो गई।
लावारिस शवों की संख्या में इजाफा ठंड से बेघरों की मौतें बढ़ गई हैं। 29 दिसंबर तक 55 से ज्यादा लावारिस शव पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंच चुके हैं, जिनमें से 35 का अंतिम संस्कार हो चुका है। पिछले साल दिसंबर में यह संख्या 42 थी। शव कोहना, रेलवे स्टेशन, हरबंश मोहाल, चमनगंज, कलक्टरगंज, चकेरी, रावतपुर, नवाबगंज, काकादेव और कोतवाली क्षेत्रों से मिले। सामाजिक संगठनों का आरोप है कि रैन बसेरों, अलाव और कंबल वितरण की व्यवस्था नाकाफी है। पोस्टमॉर्टम प्रभारी डॉ. नवनीत चौधरी ने कहा कि ठंड में लावारिस शव बढ़ रहे हैं और समय पर पोस्टमॉर्टम किया जा रहा है।
चिकित्सकों ने ठंड से बचाव की सलाह दी है। ब्लड प्रेशर मरीज दवा नियमित लें, गर्म कपड़े पहनें और लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें। प्रशासन से रैन बसेरों और अलाव की व्यवस्था बढ़ाने की मांग की जा रही है

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