किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU), लखनऊ में अब दिल और फेफड़े का प्रत्यारोपण शुरू होने जा रहा है। यह सुविधा ब्रेन डेड (मस्तिष्क मृत) व्यक्तियों के अंगदान पर आधारित होगी, और सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने यह जानकारी दी है।
मुख्य जानकारी:
- नई सुविधा: केजीएमयू के शताब्दी भवन में विशेष ट्रांसप्लांट यूनिट स्थापित की गई है, जहां पहले से ही कॉर्निया, लिवर और किडनी प्रत्यारोपण हो रहे हैं। अब दिल और फेफड़े का भी प्रत्यारोपण शुरू होगा।
- खास बात: दिल और फेफड़े का प्रत्यारोपण केवल ब्रेन डेड व्यक्तियों से ही संभव है (जीवित रिश्तेदारों से नहीं), जबकि लिवर/किडनी में रिश्तेदार अंगदान कर सकते हैं। जैसे ही ब्रेन डेड व्यक्ति से अंग मिलेगा, प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
- पिछला प्रयास: पिछले सप्ताह दिल का पहला प्रत्यारोपण होते-होते रह गया। ट्रॉमा सेंटर में एक ब्रेन डेड मरीज था, परिवार की काउंसलिंग हुई, रिसीवर भी तैयार था, लेकिन रिसीवर की मौत हो गई। इसके बाद अंग वापस परिवार को सौंप दिए गए।
- अंगदान की स्थिति:
- यूपी में किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत ~40,000 मरीजों को और लिवर की ~15,000 को है।
- दिल/फेफड़े के लिए अभी सूची नहीं, क्योंकि सुविधा शुरू नहीं हुई।
- 2025 की SGPGI रिपोर्ट के अनुसार: साल भर में 233 प्रत्यारोपणों में केवल 5 ब्रेन डेड अंगदान से हुए, बाकी जीवित दाताओं से।
- केजीएमयू में पिछले साल केवल 2 ब्रेन डेड मामलों में अंगदान हुआ।
- निजी vs सरकारी: दिसंबर 2020 से अप्रैल 2023 तक 509 प्रत्यारोपणों में 73.1% निजी अस्पतालों में हुए। सरकारी में औसत इंतजार 142 दिन, निजी में सिर्फ 12 दिन। महिलाओं का अंगदान 357 मामलों में था।
- जागरूकता की कमी: अंगदान की संख्या बहुत कम है। कुलपति ने अपील की कि ब्रेन डेड होने पर परिवार हिम्मत दिखाए—एक व्यक्ति के अंगों से कई जरूरतमंदों को नया जीवन मिल सकता है।
यह यूपी के लिए बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि सरकारी स्तर पर दिल-फेफड़े प्रत्यारोपण की सुविधा बढ़ने से गरीब मरीजों को सस्ता इलाज मिलेगा। अंगदान जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है—अपना प्लेज लें और दूसरों को प्रेरित करें! अधिक जानकारी के लिए KGMU की वेबसाइट या

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