लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ट्रेनों की संख्या 3050 और रोजाना यात्रियों की संख्या 30 लाख तक पहुंच गई है, लेकिन सरकारी रेल पुलिस (जीआरपी) की जनशक्ति पिछले 28 वर्षों से स्थिर है—केवल 6000 कर्मी। रेल मंत्रालय ने बार-बार जनशक्ति बढ़ाने के प्रस्ताव ठुकरा दिए, क्योंकि इससे अन्य राज्यों पर भी अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता।
अब यूपी पुलिस ने वैकल्पिक रास्ता अपनाया है। डीजीपी राजीव कृष्ण ने मंजूरी दी है कि कमिश्नरेट और जिलों से 2740 पुलिसकर्मी (इंस्पेक्टर से सिपाही स्तर तक, महिलाएं भी शामिल) एक वर्ष के लिए जीआरपी में विशेष ड्यूटी पर तैनात किए जाएंगे। ये कर्मचारी अपने गृह जिले के जीआरपी थानों में ही लगाए जाएंगे, ताकि स्थानीय स्तर पर बेहतर सुरक्षा मिल सके। उनकी तनख्वाह मूल जिले/कमिश्नरेट से ही जारी रहेगी। कार्यकाल बाद में बढ़ाया भी जा सकता है।
एडीजी/रेलवे प्रकाश डी. ने बताया कि श्रावस्ती जिले को छोड़कर (जहां रेल लाइन नहीं है) सभी जिलों से ये कर्मी मांगे गए हैं। इससे ट्रेनों, स्टेशनों और यात्रियों की सुरक्षा मजबूत होगी, खासकर त्योहारों और भीड़भाड़ वाले समय में।
वर्तमान में जीआरपी की आधी तनख्वाह रेल मंत्रालय वहन करता है, लेकिन केंद्र ने बढ़ोतरी से इनकार कर दिया। अन्य पुलिस शाखाओं में जनशक्ति दोगुनी-तिगुनी हुई है, पर जीआरपी को पुरानी फोर्स से ही काम चलाना पड़ रहा है। यह कदम रेल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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