गोंडा (संवाद न्यूज एजेंसी) – विश्व रेडियो दिवस (13 फरवरी) के अवसर पर रेडियो की भूमिका पर खास चर्चा हो रही है। वर्ष 2012 से मनाया जाने वाला यह दिवस रेडियो की ऐतिहासिक महत्व को याद दिलाता है। डिजिटल युग में भी रेडियो अपनी सादगी, सहजता और विश्वसनीयता से जन-जन से जुड़ा हुआ है। गोंडा जिले में रेडियो अवध 90.8 एफएम इसी का जीता-जागता उदाहरण है, जो मात्र तीन वर्षों में क्षेत्रीय सरोकारों की मजबूत आवाज बनकर उभरा है।
रेडियो अवध की सफलता की कहानी श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज, गोंडा से 5 दिसंबर 2022 से संचालित यह सामुदायिक रेडियो स्टेशन पिछले वर्ष दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में उत्तर भारत का ‘टॉप परफॉर्मर’ चुना गया। यह सम्मान स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में जनजागरूकता फैलाने के लिए दिया गया।
स्टेशन शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, महिला सशक्तीकरण और अवधी लोक संस्कृति के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। प्रसारण सुबह 6 बजे उपासना (भक्ति कार्यक्रम) से शुरू होता है। लोकप्रिय कार्यक्रमों में शामिल हैं:
- मॉर्निंग शो सुबह सवेरे
- महिलाओं के लिए आधी दुनिया (आरजे प्रिया द्वारा प्रस्तुत)
- फरमाइशी हैलो अवध
- युवाओं के लिए टीन टाइम
- अवधी संस्कृति पर शाम-ए-अवध, घर-घर की बात निहोरन चाची के साथ, यादों का झरोखा
- जागरूकता सत्र: हमसे जानिए, सेहत सही लाभ कई, सरकार आपके द्वार, गांव की सरकार, जेम्स ऑफ अवध
ये कार्यक्रम टीबी उन्मूलन, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, आधुनिक कृषि तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी घर-घर पहुंचाते हैं। रेडियो अवध सूचना, शिक्षा और संस्कृति का मजबूत सेतु बन चुका है।
रेडियो ज्ञानस्थली 89.6 एफएम: सामाजिक जागरूकता की दूसरी मजबूत कड़ी सरस्वती देवी नारी ज्ञानस्थली पीजी कॉलेज में 2019 से चल रहा यह स्टेशन सामाजिक मुद्दों पर फोकस करता है। आरजे अदनान और डॉ. आरती श्रीवास्तव के अनुसार, जनहित की योजनाएं, सामाजिक मूल्य और क्षय रोग (टीबी) जैसे विषयों पर जागरूकता फैलाई जा रही है। इसका विस्तार तेजी से हो रहा है, जो महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाने में योगदान दे रहा है।
(रेडियो अवध स्टूडियो में आरजे प्रस्तुतिकरण का दृश्य – एक महिला आरजे माइक के सामने कार्यक्रम चला रही है, जो स्थानीय सामुदायिक रेडियो की जीवंतता को दर्शाता है।)
(एक महिला आरजे स्टूडियो में हेडफोन लगाकर कार्यक्रम प्रस्तुत करती हुई – सामुदायिक रेडियो में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी का प्रतीक।)
गोंडा के ये सामुदायिक रेडियो स्टेशन साबित करते हैं कि रेडियो आज भी ग्रामीण भारत की सबसे प्रभावी और पहुंचयोग्य माध्यम है। विश्व रेडियो दिवस पर यह गौरवशाली उपलब्धि स्थानीय स्तर पर विकास और जागरूकता की नई मिसाल पेश करती है। यदि आप रेडियो अवध के किसी कार्यक्रम को सुनने या लाइव फ्रीक्वेंसी के बारे में अधिक जानना चाहें, तो बताएं!

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