February 18, 2026

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रंगे हाथ घूस लेते भाई के साथ पकड़ा गया लेखपाल, रिपोर्ट लगाने के नाम पर ले रहा था 10 हजार

Lekhpal and cousin caught red-handed taking bribe of Rs 10,000 in chandauli
सकलडीहा में तैनात लेखपाल पंकज कुमार यादव और उसके चचेरे भाई सुखबीर को एंटी करप्शन टीम ने 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी लेखपाल मूल रूप से इटावा का रहने वाला है। आरोप है कि लेखपाल ने शिकायतकर्ता से रिपोर्ट लगाने के बाबत 10 हजार की मांग की थी, इसे लेने के लिए लेखपाल ने उन्हें एक कमरे पर बुलाया था। इसके बाद टीम ने आरोपी लेखपाल और उसके चचेरे को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। एंटी करप्शन टीम आरोपियों को मुगलसराय कोतवाली ले आई।

क्या है पूरा मामला
बलुआ के बिसापुर के रहने वाले विनय प्रकाश के पिता की 2014 में मृत्यु हो गई थी। पिता की मौत के बाद विनय ने अपनी असंक्रमणीय भूमि को संक्रमणीय घोषित कराने के लिए एसडीएम के 28 जनवरी को आवेदन किया था। जिस पर सकलडीहा एसडीएम ने क्षेत्र के लेखपाल पंकज कुमार यादव से रिपोर्ट देने को कहा था। पीड़ित विनय प्रकाश ने बताया कि लेखपाल पंकज ने रिपोर्ट लगाने के नाम पर 10 हजार की मांग की थी। इसके बाद उन्होंने 13 फरवरी को इसकी शिकायत एंटी करप्शन टीम से की।
इसके बाद सोमवार की लेखपाल पंकज यादव को सकलडीहा को स्थित एक कमरे पर बुलाया जहां उसने अपने चचेरे भाई सुखबीर के जरिए उससे दस हजार रुपये ले लिए। रुपये लेते ही एंटी करप्शन टीम ने लेखपाल और उसके भाई को रंगे हाथ पकड़ लिए। इसके बाद टीम दोनों को मुगलसराय कोतवाली ले आई और आगे की कार्रवाई में जुट गई
आरोपी लेखपाल पंकज कुमार यादव इटावा जिले के फ्रेंड्स कॉलोनी थाना क्षेत्र के शकुंतला नगर नई मंडी का रहने वाला है। वर्ष 2016 में लेखपाल नियुक्त हुआ था। वहीं दूसरी तरफ शिकायतकर्ता ने आरपी लेखपाल के अन्य साथी लेखपालों पर धमकी देने का आरोप भी लगाया है। शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से करने की बात कही। इस संबंध में सीओ अरुण कुमार सिंह ने बताया कि एंटी करप्शन की ओर से मिली फर्द के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
चार माह पहले बदला गया था क्षेत्र
स्थानीय तहसील में लेखपाल पंकज यादव की तैनाती वर्ष 2016 में हुई थी। इटावा के रहने वाले पंकज की भाषा ग्रामीणों को समझ में नहीं आती थी। लेखपाल की तैनाती लगभग दो साल जनौली व एक साल पीथापुर में भी रही। चार माह पूर्व क्षेत्र बदलकर असवरिया से मथेला व हृदयपुर दिया गया था।

दस साल से तहसील में डटे हैं कई लेखपाल
स्थानीय तहसील में दस साल की सेवा देने के बाद भी कई लेखपाल जुगाड़ लगाकर तैनात हैं। लेखपालों के हल्का में फेर-बदल हुआ भी तो तहसील के ही आसपास के गांवों में कई बार होने का आरोप लग चुका है। लेखपाल की मनमानी की ओर किसी बड़े अधिकारी का ध्यान नहीं जाता है।