
बांदा जिले में रामभवन पर प्राथमिकी दर्ज कर छानबीन करने वाली सीबीआई टीम जब कड़ियां जोड़ने लगी तो उसे भी पसीना आ गया था। पूरा मामला इन दिनों में चर्चा में चल रहे एपस्टीन कांड जैसा था। रामभवन ने ब्राजील, अमेरिका, चीन, अफगानिस्तान समेत करीब 47 देशें में अश्लील वीडियो सांझा किए थे।
जेई के जाने के बाद पत्नी भी करती थी शारीरिक शोषण
यदि आप वह अश्लील वीडियो देखें और किसी भी पीड़ित बच्चे से उनका दर्द साझा करते तो निश्चित ही आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे…आपको गुस्सा आना तय है। दोनों की हैवानियत सुनकर फांसी की सजा भी कम लगेगी। इस कड़ी में एक पीड़ित बालक से बात हुई। हालांकि इस समय उसकी उम्र 18 वर्ष है। वह हमीरपुर के एक गांव का रहने वाला है।
कपड़े व जूते भी दिलाए थे
उसने बताया कि करीब 10 वर्ष पहले वह रामभवन के संपर्क में आया था। उसने बताया कि दोनों ने पहले मजदूर पिता का भरोसा जीता, इसके बाद उसे अपने घर ले जाकर लाइव वीडियो गेम खेलने को दिया। यह सिलसिला करीब 15 दिन चला था। इस बीच उसने अच्छा खाना देने के अलावा कपड़े व जूते भी दिलाए थे। एक दिन अचानक उसने अश्लील वीडियो दिखाकर गलत काम करना शुरू कर दिया।
दुर्गावती भी करती थी शारीरिक शोषण
वह जब चिल्लाया तो उसकी पत्नी (जो पहले से दरवाजे पर बैठी थी) ने डंडा लाकर दिया इसके बाद उसकी जमकर पिटाई हुई। इसके बाद रामभवन ने उसका शोषण किया और दुर्गावती वीडियो बनाती रही थी। बालक ने बताया कि अभी जुल्म की हदें पूरी नहीं हुई थीं। जब रामभवन घर के बाहर जाता, तो दुर्गावती उसका शारीरिक शोषण करती थी।
आज भी वह स्कूल नहीं जाता
इससे उसके शरीर में कई स्थानों पर घाव हो गए थे। मना करने पर पीटती थी। यह भयानक मंजर करीब दो वर्ष तक चला था। इसके बाद नहर का काम पूरा होने के बाद दोनों चले गए लेकिन वह इस दर्द से आज भी ऊबर नहीं पाया है। आज भी वह स्कूल नहीं जाता है। सीबीआई वाले अंकल जब कोर्ट ले गए थे, तो वहां उसने सारी बात बता दी थीं।
काउंसलिंग के बाद बयान देने को तैयार हुए पीड़ित बच्चे
लोक अभियोजक दारा सिंह मीना ने बताया कि जिन बच्चों का शोषण हुआ उसमें आठ हमीरपुर, 11 चित्रकूट और 15 बच्चे बांदा जिले के शामिल थे। इन सभी की चाइल्ड लाइव संस्था के सहयोग से काउंसलिंग की गई। जिससे वह बयान देने को तैयार हुए।
बयान के दौरान दोनों की पहचान भी की थी
सबसे पहले बच्चों का भरोसा जीता और उन्हें विश्वास दिलाया था कि अब वह सुरक्षित हैं, तब जांच आगे बढ़ सकी थी। सभी बच्चों ने बयान के दौरान दोनों की पहचान भी की थी। जिससे रिपोर्ट दर्ज करने और फांसी तक पहुंचाने में बहुत मदद मिली। बताया कि बच्चों का उपचार एम्स में कराने के बाद आज सभी स्वस्थ हैं।
रामभवन अब कैदी नंबर 40, दुर्गावती कैदी नंबर 41 से जानी जाएगी
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोषी दंपती की करवट बदल कर रात गुजरी। रामभवन रात 11 बजे तक बैरक नंबर तीन बी में टहलता रहा। मौत की सजा पाए रामभवन अब जेल में 40 नंबर कैदी से पहचाना जाएगा। जबकि सह दोषी उसकी पत्नी दुर्गावती की नई पहचान कैदी नंबर 41 होगी। मंडल कारागार प्रशासन ने दोनों को सीटी नंबर आवंटित कर दिए हैं।
बैरक में बेचैन हालत में टहलता रहा
अब इन नंबरों से ही उनकी पहचान होगी। सजा सुनाए जाने के बाद देर शाम रामभवन व उसकी पत्नी दुर्गावती जेल पहुंचे थे।जेल प्रशासन ने रामभवन को बैरक नंबर तीन बी में रखा था। जबकि उसकी पत्नी दुर्गावती को बैरक नंबर 13 में बंद किया गया है। रामभवन रात में 11 बजे तक अपनी बैरक में बेचैन हालत में टहलता रहा। उसे नींद नहीं आई।
साथी बंदी भी उससे किनारा बनाए रहे
साथी बंदी भी उससे किनारा बनाए रहे। इसी तरह से इस घिनौने कृत्य में शामिल उसकी सह दोषी पत्नी दुर्गावती भी अपनी बैरक में गुमसुम बैठी दिखी। जेलर आलोक कुमार ने बताया कि रामभवन को कैदी नंबर 40 मिला है। जबकि उसकी पत्नी दुर्गावती को 41 नंबर दिया गया है। अब उनकी जेल में पहचान 40 और 41 नंबर से होगी।
