कानपुर। रमजान माह में मस्जिदें आबाद हैं। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में राैनक बढ़ी है। बांसमंडी स्थित मस्जिद में तकरीर कर रहे शहरकाजी मुफ्ती साकिब अदीब मिस्बाही ने कहा कि रमजान का पहला अशरा रहमत का होता है जो अभी चल रहा है। दूसरा अशरा माफी और तीसरा अशरा निजात का होता है जो हमें जहन्नुम की आग से बचाएग
वहीं, कर्नलगंज स्थित दरगाह पर हजरत फातिमा जहरा की याद में जलसे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आए उलेमाओं ने फातिमा जहरा के बताए रास्ते पर चलने के लिए कहा। कहा कि गरीबों, मजलूमों की मदद करने व गरीब बेटियों की शादी कराने वालों को हज का सवाब मिलता है। आप सक्षम हैं तो जरूर मदद करें। सलातो सलाम पेशकर दुआ हुई। दुआ में भारत में खुशहाली, तरक्की, बेटियों को इल्म दौलत और वहशी हरकत करने वालों पर कुदरती कहर नाज़िल होने की दुआ हुई। यहां इखलाक अहमद डेविड चिश्ती, हाफिज मोहम्मद अरशद, मुनीर अहमद कादरी, अबरार अहमद, अफजाल अहमद आदि मौजूद रहे।
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