February 23, 2026

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गर्भवती की ओर से चीरा लगाने की जांच के लिए पहुंची कमेटी

A committee arrived to investigate the incision made by a pregnant woman.
फखरपुर। नंदवल गांव में प्रसव वेदना न सह पाने के कारण खुद ही पेट में ब्लेड से चीरा लगाने के मामले की जांच करने शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की हाई पॉवर कमेटी सीएचसी फखरपुर पहुंची। जांच कमेटी का नेतृत्व संयुक्त निदेशक परिवार कल्याण डॉ. सुशील कुमार कर रहे थे

टीम के पहुंचते ही सीएचसी बंद कर दी गई। किसी भी मीडियाकर्मी के अंदर जाने की इजाजत नहीं थी। लगभग चार घंटे चली जांच के दौरान अधिकारियों ने दस्तावेज खंगालने के साथ जिम्मेदार अधिकारियों का बयान दर्ज किया।

अधिकारी जब बाहर निकले तो मीडिया कर्मियों ने उन्हें घेर लिया। इस पर संयुक्त निदेशक ने बस इतना कहा कि अभी जांच चल रही है। ऐसे में पहले से कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। टीम के साथ चल रहे सीएमओ डॉ. संजय शर्मा से जब जांच संबंधी जानकारी लेने की कोशिश की गई तो उनका जवाब था कि मैं कुछ नहीं कह सकता।

टीम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से डॉ. रवि दीक्षित भी शामिल रहे। इस मौके पर सीएमओ के अतिरिक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एमएमएम त्रिपाठी तथा सीएचसी फखरपुर के अधीक्षक डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह भी उपस्थित रहे।
बृहस्पतिवार को बौंडी के नंदवल गांव निवासी ननकई (38) को प्रसव वेदना हुई तो उसने दर्द बर्दाश्त न कर पाने के कारण ब्लेड से अपने पेट में चीरा लगा लिया। गांव के लोगों ने सीएचसी फखरपुर पहुंचाया तो वहां नार्मल डिलीवरी कराई गई। हालत गंभीर होने पर महिला को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। उसका उपचार चल रहा है।

ननकई का यह छठा प्रसव था। उसके पति की मौत पहले ही हो गई थी। महिला ने जिला अस्पताल में कहा कि वह घर में अकेली थी। असहनीय दर्द से परेशान होकर उसने ब्लेड से अपना पेट चीर लिया। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि महिला के गर्भवती होने पर उसका पंजीकरण क्यों नहीं कराया गया। यदि पंजीकरण था, तो प्रसव पीड़ा शुरू होते ही उसे सीएचसी क्यों नहीं पहुंचाया गया।