February 24, 2026

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बोलकर उपन्यास लिखवाते थे अमृतलाल नागर

Amritlal Nagar used to dictate novels.
लखनऊ। लोक संस्कृति शोध संस्थान की ओर से कथाकार अमृतलाल नागर की पुण्यतिथि पर बान वाली गली में स्थित सेठ पन्नालाल अग्रवाल धर्मशाला में रविवार को लोक चौपाल का आयोजन किया गया। इससे पूर्व उनकी ऐतिहासिक ड्योढ़ी पर शहर के प्रबुद्धजनों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। लोक संस्कृति विशेषज्ञ शाखा वंद्योपाध्याय ने अमृतलाल नागर की रचनाधर्मिता और उनकी व्यापक लोक-स्वीकार्यता के बारे में बताया।

वरिष्ठ साहित्यकार दयानंद पांडेय ने कहा कि नागर जी प्रायः अपने उपन्यास बोलकर लिखवाते थे। उनके सान्निध्य में अनेक लोग लेखक और संपादक बने। नागर जी ने फिल्मी कथा-पटकथा लेखन से लेकर सामाजिक-ऐतिहासिक विषयों तक व्यापक अनुभव अर्जित किया था। वे किसी भी कृति के लेखन से पूर्व गहन शोध और तथ्य संग्रह करते थे। खंजन नयन, सुहाग के नूपुर, शतरंज के मोहरे, ये कोठे वालियां और गदर के फूल जैसी कृतियां उनकी शोध संपन्न लेखनी का प्रमाण हैं। अमृतलाल नगार के उपन्यास नाच्यो बहुत गोपाल के लेखन काल में उनके लिपिक रहे और बाद में संगीत नाटक अकादमी में कार्यरत रहे राजेंद्र वर्मा ने उनके लेखकीय अनुशासन, शोधपरक दृष्टि और जीवंत कथन-शैली की प्रशंसा की। संचित स्मृति ट्रस्ट के प्रतिनिधि नरेंद्र वर्मा ने उनकी प्रपौत्रियों प्रो. ऋचा नागर और डाॅ. दीक्षा नागर के संदेशों को पढ़कर सुनाया।

चौपाल में डाॅ. अपूर्वा अवस्थी ने नागर जी के लिखे जयशंकर प्रसाद के संस्मरण का वाचन किया। कार्यक्रम संचालक अर्चना गुप्ता ने नागर जी की रचना को स्वर दिया। साहित्यकार डाॅ. करुणा पांडेय ने उनकी रचनाओं को ऐतिहासिक दस्तावेज बताया। श्रीकृष्ण द्विवेदी द्विजेश ने कविता सुनाई- मानस के हंस को दिखाया जनमानस में, नागर का लखनऊ चौक दिव्य धाम है…। संस्थान के अध्यक्ष जीतेश श्रीवास्तव, सचिव डॉ. सुधा द्विवेदी, डाॅ. अनिल गुप्ता, प्रवीन अग्रवाल, सीमा सक्सेना, डाॅ. एसके गोपाल, हेमलता त्रिपाठी, मनु राय, आशा श्रीवास्तव, देवेश्वरी पवार, शकुंतला श्रीवास्तव, अंजलि खन्ना, ज्योति किरन रतन, राज नारायण वर्मा, सोनल ठाकुर, होमेंद्र मिश्रा, सुशील श्रीवास्तव, अखिलेश त्रिवेदी शाश्वत, हिमांशु गर्ग, संजीव गुप्ता आदि मौजूद रहे।