
डॉ. विशाखा शुक्ला ने कहा कि कुत्तों को बंदी बनाना समस्या का समाधान नहीं है। एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) कार्यक्रम को पूर्ण वित्तपोषण और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए तथा साक्ष्य-आधारित रेबीज रोकथाम पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने नगर निकायों की जवाबदेही तय करने, निर्धारित भोजन क्षेत्र विकसित करने, संस्थागत पशु कल्याण समितियां बनाने और संस्थानों में बिना बंदीकरण वाले सुरक्षित क्षेत्र विकसित करने की भी मांग की।
प्रतिभागियों का कहना था कि प्रशासनिक कमियों के समाधान के रूप में हर जगह बंदीकरण ढांचा खड़ा करना उचित नहीं है। इसके बजाय टीकाकरण, जागरूकता और संरचित कैंपस प्रबंधन को मजबूत करना अधिक मानवीय और व्यावहारिक उपाय है। रैली में अंबिका शुक्ला, गौरी मौलेखी, संक्षय बब्बर, पर्सी बिलिमोरिया, जयदीप माथुर, जैस्मिन दमकेवाला, पौलोमी पाविनी शुक्ला, डॉ. विवेक विश्वास, रात्री किशोर और विशाखा चटर्जी सहित कई रेस्क्यू संगठनों व नागरिक समूहों के सदस्य मौजूद रहे।
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