February 26, 2026

TNC Live TV

No.1 News Channel Of UP

ग्लोबल वार्मिंग ने खत्म किए 70% सूक्ष्म जीव, थाली तक पहुंच रहा कुपोषण, ये है CSA की चेतावनी

Kanpur Soil in danger Global warming has wiped out 70% of microorganisms leading to malnutrition CSA warns

ग्लोबल वॉर्मिंग से हो रहे जलवायु परिवर्तन ने मिट्टी के सूक्ष्म जीवों के संसार को भी संकट में डाल दिया है। इनकी संख्या तेजी से घट रही है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर आ रहा है। इस मिट्टी में उगने वाली फसलों के पौधे कुपोषित हैं। इस वजह से इनका सेवन करने वाले लोगों में भी कुपोषण होने लगता है। कृषि विज्ञान केंद्रों में हो रही मिट्टी की जांच में यह पता चला है। अमूमन एक ग्राम स्वस्थ और उपजाऊ मिट्टी में इन सूक्ष्म जीवों की संख्या पांच करोड़ से अधिक होती है, लेकिन अब डेढ़ करोड़ रह गई है।

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डॉ. महक सिंह का कहना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग में तापमान अधिक होता है। इससे भी सूक्ष्म जीव कम हो जाते हैं। इसके अलावा खेतों में जैविक खाद न डालने से इनका संसार नष्ट होता है। ये जीव सबसे अधिक गोबर की खाद डालने पर बढ़ते हैं। विवि 15 कृषि विज्ञान केंद्र संचालित कर रहा है। केंद्रों में खेतों की मिट्टी के पौष्टिक तत्व और सूक्ष्म जीवों की जांच की जाती है। निदेशक शोध डॉ. सिंह ने बताया कि सबसे अधिक आर्गेनिक तत्व कम हुआ है।

मिट्टी के उर्वरा चक्र को सक्रिय रखते हैं सूक्ष्म तत्व
50 साल पहले इसका प्रतिशत दो होता था और अब .1 और .2 दो प्रतिशत रह गया। सूक्ष्म जीव इससे पोषण पाते हैं। आर्गेनिक तत्व इन सूक्ष्म जीवों की सक्रियता को बढ़ाता है। इको सिस्टम में इन जीवों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। साथ ही ये मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं। मिट्टी के 18 पौष्टिक तत्वों को सक्रिय करते हैं। सीएसए के वरिष्ठ मृदा विज्ञानी डॉ. खलील खान का कहना है कि सूक्ष्म तत्व मिट्टी के उर्वरा चक्र को सक्रिय रखते हैं।

पौष्टिकता से भरपूर रहेगी फसल
मृदा जांचों में अन्य पौष्टिक तत्वों के साथ सूक्ष्म जीव भी घटे हैं। कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से गोबर की खाद का अधिक इस्तेमाल करने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। यह भी बताया जा रहा है कि फसलों के अवशेषों को जलाएं नहीं, उन्हें खेतों में सड़ने दें और जोत दें। केंचुए की खाद, हरी खाद आदि के इस्तेमाल से भी इन सूक्ष्म जीवों का बचाव होगा। साथ ही, फसल पौष्टिकता से भरपूर रहेगी।

इसलिए जरूरी हैं सूक्ष्म जीव
सूक्ष्म जीव पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण करते हैं, कार्बनिक पदार्थों को अपघटित करते हैं। इससे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, सल्फर आदि पोषक तत्व पौधों के अवशोषण के लिए उपलब्ध होते हैं। नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करते हैं। कवक के धागे मिट्टी के कणों को बांधकर रखते हैं। इससे छिद्रयुक्त मिट्टी बनती है। पौधों की सुरक्षा करते हैं। जैव उपचार भी करते हैं।