
पिपराइच में ही वर्ष 2008 में एक दुकान पर पैकेटबंद नमकीन का नमूना फेल मिला था। खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के 7/16 जीएफए एक्ट के तहत दयाशंकर गुप्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई। इस मामले की सुनवाई पूरी हो गई है लेकिन सैंपल विभाग में मौजूद है। नियमत: इसे नष्ट करा देना चाहिए।
सहायक आयुक्त, खाद्य एवं औषधि सुरक्षा डॉ सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि नए अधिनियम के मुताबिक, अब एक महीने में ही सैंपल को चैलेंज करना है। जिन मामलों में लैब की रिपोर्ट पॉजीटिव है, उसके सैंपल रखने पड़ते हैं। सैंपल के बेहतर रख-रखाव की व्यवस्था जल्द कर ली जाएगी।
जब तक केस की सुनवाई चल रही है, सैंपल को सुरक्षित रखना होता है। कभी-कभी सैंपल को चैलेंज किया जाता है। ऐसे में सैंपल पर लगे टैग से रिपोर्ट की मिलान की जाती है। कुछ सैंपल जल्दी नष्ट होने वाले होते हैं। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी विभाग की है। अगर कोर्ट में साक्ष्य नहीं मिलेंगे तो इसका लाभ आरोपी को मिल सकता है: वीके मालवीय, वरिष्ठ अधिवक्ता
19 साल पहले मिठाई के नमूने लिए, सैंपल खराब
पिपराइच क्षेत्र में 2007-08 में मिठाई के नमूने फेल मिले थे। खाद्य सुरक्षा विभाग ने 7/18 जीएफए एक्ट के तहत दुकानदार राममिलन गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। मामले की सुनवाई अभी भी चल रही है। छेना की मिठाई के नमूने अब किसी काम के नहीं हैं।
आरोपी दोषमुक्त, सैंपल अब भी सुरक्षित
वर्ष 2008-09 में चौरीचौरा में अवधेश और बाबूराम उर्फ रमेश की दुकान पर अरहर दाल में खेसारी दाल की मिलावट पकड़ी गई। सैंपल रिपोर्ट आने के बाद प्राथमिकी दर्ज हुई। बाबूराम को साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने दोष मुक्त कर दिया। आज भी वह सैंपल विभाग में पड़ा हुआ है। उसे नष्ट नहीं कराया गया।
