
यूपी देश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है जिसके पास सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे का नेटवर्क होगा। फरवरी तक प्रदेश में कुल 22 एक्सप्रेसवे का नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। इनमें पूर्वांचल, बुंदेलखंड, आगरा-लखनऊ, यमुना, दिल्ली-मेरठ, नोएडा-ग्रेटर नोएडा और गोरखपुर समेत सात एक्सप्रेसवे पूरी तरह संचालित हैं। तीन निर्माणाधीन हैं और 12 प्रस्तावित या स्वीकृत हैं। सीएम योगी ने अपने जापान दौरे पर प्रदेश में एक्सप्रेसवे के किनारे 27 इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की घोषणा भी की है।
वर्तमान में संचालित एक्सप्रेसवे न केवल पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को जोड़ रहे हैं बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सीधी और तेज कनेक्टिविटी भी सुनिश्चित कर रहे हैं। निर्माणाधीन परियोजनाओं में गंगा एक्सप्रेसवे सबसे महत्वपूर्ण है। 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज को जोड़ेगा।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे समेत अन्य परियोजनाएं भी निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं। 320 किमी लंबा विंध्य एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है। यह प्रयागराज से सोनभद्र को जोड़ेगा। गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे सहित अन्य लिंक परियोजनाएं प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्य औद्योगिक धारा से जोड़ने का माध्यम बनेंगी।
लॉजिस्टिक दक्षता में सुधार से प्रदेश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। निर्यात उन्मुख उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा और छोटे व मध्यम उद्यमों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे। बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे अपेक्षाकृत पिछड़े क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ने से क्षेत्रीय असंतुलन भी घटेगा।