March 3, 2026

TNC Live TV

No.1 News Channel Of UP

मिसाइलों के साए में भी नहीं डिगा हौसला, बंकरों में बीत रही रात

Even under the shadow of missiles, their spirits remained unshaken, spending the night in bunkers.
मिहीपुरवा/बाबागंज। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान–इस्राइल के बीच जारी हमलों के साये में बहराइच जिले के मिहीपुरवा व बाबागंज क्षेत्र के कई श्रमिक इस्राइल में रोजगार के लिए रह रहे हैं। गांवों में टीवी स्क्रीन पर मिसाइलों और सायरन की खबरें बेचैनी बढ़ा रही हैं, लेकिन हर रोज आने वाला एक फोन कॉल “हम सुरक्षित हैं परिजनों के लिए सबसे बड़ी राहत बन गया है।

पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात के बीच तहसील क्षेत्र मिहीपुरवा के आठ और बाबागंज क्षेत्र के चार श्रमिक इस्राइल के विभिन्न शहरों में काम कर रहे हैं। गांवों में परिजन दिन-रात चिंता में डूबे हैं, लेकिन तेल अवीव और आसपास के इलाकों से रोज आ रही आवाज उन्हें हिम्मत दे रही है।

सायरन बजते ही दौड़ पड़ते हैं बंकर की ओर
ग्राम पुरैना रघुनाथपुर के नब्बेपुरवा, नधापुरवा और खैरीपुरवा के संतोष कुमार, बाल किशन, राम प्रसाद, महेंद्र, सोनू, संदीप, संजय, अर्जुन और राकेश भवन निर्माण कार्य से जुड़े हैं। जून 2024 में ये सभी बेहतर रोजगार की तलाश में इस्राइल गए थे। संतोष कुमार ने फोन पर बताया, “मोबाइल पर पहले अलर्ट संदेश आता है, फिर सायरन बजता है। हम लोग तुरंत पास के बंकर में चले जाते हैं। कुछ देर बाद स्थिति सामान्य होने पर बाहर निकलते हैं।”

शादी में घर लौटे, लेकिन साथियों की चिंता बरकरार
25 फरवरी को सोनू की शादी के कारण वह और मनोज कुमार घर लौट आए। गांव में शादी की खुशियां थीं, लेकिन बाकी साथियों की चिंता भी बनी रही। गांव लौटे मनोज ने बताया कि वहां भारतीय श्रमिकों को सम्मान मिलता है। औसतन दो लाख रुपये तक की आय प्रतिमाह हो जाती है। सुरक्षा को लेकर सरकार बेहद सख्त है और हर नागरिक को आपात स्थिति में क्या करना है, इसकी स्पष्ट जानकारी दी जाती है।

बाबागंज के श्रमिक भी सतर्क
बाबागंज क्षेत्र के चरदा निवासी मुकेश कुमार, शंकरपुर जलालपुर के राकेश कुमार, इमलिया हाड़ा के विनोद कुमार और सुजीत कुमार भी इस्राइल में काम करते हैं। मुकेश कुमार स्टील और लोहे के गेट व रेलिंग आदि का काम करते हैं। उनके भाई रामनरेश ने बताया, “आसमान में रॉकेट उड़ते दिखाई देते हैं, लेकिन सुरक्षा मजबूत है।”

मुकेश की पत्नी और तीन वर्षीय बेटा गांव चरदा में रहते हैं। संयुक्त परिवार में रहने वाले इस परिवार की नजरें हर दिन फोन पर टिकी रहती हैं। मुकेश सबसे छोटे भाई हैं और उनके पिता का देहांत हो चुका है। उनकी भाभी मंजू देवी ग्राम पंचायत चरदा की प्रधान हैं।
गांवों में दहशत और दुआ
गांवों में सुबह-शाम लोग टीवी पर खबरें देखते हैं। धमाकों की खबरें बेचैनी बढ़ाती हैं, लेकिन जब फोन पर “सब ठीक है…” सुनाई देता है तो सुकून मिलता है। ग्राम प्रधान मंजू का कहना है कि प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जरूरत पड़ने पर शासन को अवगत कराया जाएगा।