March 3, 2026

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देश की राजधानी नरेंद्र, CM का नाम मोदी, प्राथमिक विद्यालय के बच्चे ने दिया ये जवाब; निपुणता पर उठे सवाल

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 ‘निपुण’ शब्द का अर्थ है किसी कार्य में अत्यधिक कुशल, पारंगत, माहिर या प्रवीण होना। केंद्र व राज्य सरकार की ओर से प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों को निपुण बनाने का लक्ष्य दिया गया है, लेकिन जिले में इस पर काम होता नहीं दिख रहा।

जिले के प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों का हाल यह है कि उन्हें अपने देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम तक नहीं पता है। फिर भी बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से बीते अक्तूबर में जारी परिणाम के अनुसार 82 फीसदी बच्चों को निपुण बताया गया है। यही नहीं, इस आंकड़े के साथ वाराणसी को प्रदेश के टॉप 5 जिलों में चौथा स्थान मिला है।

इसकी जमीनी हकीकत कुछ और है। की ओर से कई विद्यालयों की पड़ताल की गई तो बच्चों की वस्तुस्थिति सामने आई। शहर के प्राथमिक विद्यालय पुलिस लाइन में कुछ बच्चे तो बहुत ही अच्छे मिले, जबकि कुछ बहुत ही कमजोर मिले। रामनगर के तीन प्राथमिक विद्यालयों में बच्चे पहाड़ा नहीं बता पाए। दानगंज और चौबेपुर क्षेत्र के बच्चों को देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का नाम भी नहीं पता था। इस बाबत जब शिक्षकों से बातचीत की गई तो उन्होंने एसआईआर में ड्यूटी लगने के कारण ध्यान न दे पाने की बात कही।

हैरान कर देंगे ये जवाब

केस 1 : कंपोजिट नवीन प्राथमिक विद्यालय, रामनगर में कक्षा 5 की छात्रा से जब पूछा गया कि क्या उसे पहाड़ा आता है, तो बच्ची ने बताया कि हां, 20 तक आता है। जब 12 का पहाड़ा पूछा गया तो बच्ची पूरा नहीं सुना पाई।

केस 2 : प्राथमिक विद्यालय पुलिस लाइन में प्रधानाचार्य ने रिपोर्टर के सामने ही सॉफ्टवेयर पर उनका निपुण टेस्ट कराया। इसमें दो बच्चों के अलावा कोई बच्चा समय पर जवाब नहीं दे पाया। प्रधानाचार्य ने सवाल हल कराए।

केस 3 : प्राथमिक विद्यालय नियार में कक्षा 5 के बच्चों को पहाड़ा पूरा नहीं आता। सामान्य ज्ञान भी कमजोर मिला। यहां के बच्चे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का नाम नहीं बता पाए। शिक्षकों ने कहा कि बच्चों पर ध्यान दिया जा रहा है और जल्द सुधार देखने को मिलेगा।

केस 4 : कंपोजिट विद्यालय शिवपुर में स्थिति सबसे खराब मिली। कक्षा 7 के बच्चे से पांच फूलों के नाम पूछे गए, लेकिन बच्चा नहीं बता पाया। बच्चे को पहाड़ा केवल 12 तक आता था और देश के राष्ट्रपति व प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम भी नहीं पता था।

केस 5 : प्राथमिक विद्यालय भरलाई में कक्षा 5 की सिर्फ एक छात्रा ही कुछ प्रश्नों के उत्तर दे पाई। शेष बच्चों से सवाल पूछने पर प्रधानाचार्य ने आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि सभी बच्चों की स्थिति पढ़ाई में ठीक नहीं है।

केस 6 : प्राथमिक विद्यालय बरियासनपुर में कक्षा 5 के छात्र से देश की राजधानी पूछी गई तो बच्चे ने “नरेंद्र” बताया। उसी कक्षा के दूसरे छात्र से मुख्यमंत्री का नाम पूछा गया तो उसने “मोदी” बताया। अधिकांश बच्चों को पहाड़ा आता ही नहीं था

जिले के 1143 विद्यालयों में बीते 27 जनवरी से 9 फरवरी तक निपुण असेसमेंट कराया गया। परिणाम अभी नहीं आए हैं। अधिकारियों के मुताबिक निपुण असेसमेंट के परिणाम अगले सप्ताह आने की उम्मीद है। बीएसए ने बताया कि निपुण टेस्ट हाल ही में कराया गया है। जो विद्यार्थी निपुण श्रेणी में शामिल नहीं हो पाएंगे, उन्हें दोबारा मौका दिया जाएगा। कमजोर पाए गए बच्चों के लिए विशेष प्रयास किए जाएंग

विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक विद्यार्थियों को ग्रुप ए की श्रेणी में शामिल करना है। अक्तूबर 2025 में जारी परिणाम के अनुसार प्रदेश के टॉप 5 जिलों में 84.31 फीसदी पाकर कन्नौज पहले स्थान पर, 83.26 फीसदी पाकर महाराजगंज दूसरे स्थान पर, 83.03 फीसदी पाकर बिजनौर तीसरे स्थान पर, 82.62 फीसदी पाकर वाराणसी चौथे स्थान पर है।निपुण लक्ष्य को पूरा करने के लिए इस बार योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। विद्यालयों में शिक्षकों के माध्यम से बच्चों का मूल्यांकन कर उन्हें तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। बच्चों को उनके स्तर के अनुसार पढ़ाया जाएगा। शत-प्रतिशत निपुण बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। – अनुराग श्रीवास्तव, बीएसए