
कानपुर में जाजमऊ और रूमा के लोगों के शरीर में अभी भी कैंसरकारी क्रोमियम घुला हुआ है लेकिन इसको रोकने की कोई भी व्यवस्था अभी तक नहीं की गई है। इन लोगों के इलाज की भी व्यवस्था नहीं की गई है। स्वास्थ्य विभाग भी खून के नमूने इकट्ठे कर पल्ला झाड़ रहा है। प्रदूषण, जलकल जैसे विभागों की ओर से भी कोई खास काम पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए नहीं किया जा रहा। इसी के चलते फरवरी में आई 233 लोगों की रिपोर्ट में 215 के शरीर में क्रोमियम, चार में मरकरी और 10 लोगों में लेड पाया गया है।
लेड और मर्करी जैसे तत्व भी शरीर के लिए हानिकारक
इसके अलावा इन क्षेत्रों में पीने का पानी पहले की तरह ही अभी भी दूषित आ रहा है। जलकर विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया कि अभी कुछ और लोगों की रिपोर्ट आनी बाकी है। लगातार लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं लेकिन इनमें कोई भी समस्या नहीं है। किसी भी तरह के कोई लक्षण नहीं है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की उप प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. रिचा गिरी ने बताया कि ये तीनों तत्व शरीर के लिए नुकसानदायक हैं। क्रोमियम लिवर किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। लेड और मर्करी जैसे तत्व भी शरीर के लिए हानिकारक हैं।
कुल 1500 लोगों की आ चुकी रिपोर्ट, 90 प्रतिशत लोगों के खून में क्रोमियम
जाजमऊ, रूमा, पनकी इंडस्ट्रियल एरिया, नौरैयाखेड़ा, गोलाघाट, राखी मंडी, तेजाब मिल जैसे क्षेत्र में रहने वाले करीब 40 हजार लोगों के खून की जांच स्वास्थ्य विभाग को करनी है। विभाग के अनुसार अब तक 80 से ज्यादा कैंप लगाकर करीब पांच हजार लोगों के खून की जांच के नमूने इकट्ठे किए जा चुके हैं। करीब एक डेढ़ हजार लोगों की रिपोर्ट आ चुकी है, जिसमें 90 प्रतिशत लोगों के खून में क्रोमियम पाया गया है। पांच प्रतिशत लेड और मरकरी भी पाया गया है। इन रोगियों के इलाज की जिम्मेदारी एम्स ने उठाने के लिए कहा था पर समाधान अभी तक नजर नहीं आया है।गाइडलाइन के अनुसार अब नए तरीके से सर्वे होगा। इसमें प्रभावित क्षेत्रों की जनसंख्या जांची जाएंगी। उसके बाद कितने परिवार और परिवार में कितने लोग हैं, उनकी संख्या की गणना की जाएगी। अभी तक रैंडम सैंपलिंग हुई है। अब एक साथ प्रभावित क्षेत्रों में सभी की जांच करेंगे जिसमें करीब 40 हजार लोग शामिल हैं। इसके लिए हमने शासन से बजट भी मांगा है। -डॉ. हरिदत्त नेमी, सीएमओ
यह होना था पर नहीं हुआ
जनवरी में एम्स के दो अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जलकल विभाग, आईआईटी और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के अफसरों की बैठक हुई थी। इसमें क्षेत्र में पानी की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए नई तरीके से सर्वे, रोगियों के इलाज और निगरानी पर चर्चा हुई। तय हुआ कि कैंप में क्लीनिकल परीक्षण होगा और ऐसे रोगियों को पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम देखेगी और जिनके कोई लक्षण होंगे, उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर करेगी। ऐसे रोगियों का प्राथमिकता से इलाज किया जाएगा। बाकी जिन रोगियों में लक्षण नहीं होंगे, उनकी निगरानी स्वास्थ्य विभाग करेगा। इनमें से कोई कार्य अभी तक धरातल पर नहीं हुआ है।

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