
उन्होंने लोगों को गोरक्षा का संकल्प दिलाया और शिवाजी महाराज के गो, ब्राह्मण प्रतिपालक होने पर शास्त्रीय आधार से विवेचना करते हुए बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक थे। शिवाजी महाराज ने 12 वर्ष की उम्र में एक गो हत्यारे को दंडित कर उसकी पकड़ से गो माता को छुड़ाकर गोमाता के लिए प्राण-प्रण से लड़ने की उद्घोषणा की।
शंकराचार्य ने कहा कि वर्तमान में हमारे बीच ऐसे लोग हैं जो गाय, ब्राह्मण और मंदिरों को नष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं, उनसे धर्मयुद्ध लड़कर छद्म हिंदुओं को पहचानने का समय आ गया है। इसी का आरंभ वे आज से कर रहे हैं। घाट पर कलाकारों ने शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित लघु नाटिका की भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
शंकराचार्य को करपात्र गोभक्त सम्मान
अखिल भारतीय सारस्वत परिषद की ओर से शंकराचार्य को गोरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों के प्रतिफल स्वरूप करपात्र गोभक्त सम्मान से सम्मानित किया गया। संस्था के गिरीश चंद्र तिवारी एवं प्रो. विवेकानंद तिवारी ने यह पहला सम्मान शंकराचार्य को प्रदान किया।

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