कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हैलट अस्पताल में पैथोलॉजी दलालों का गिरोह बेखौफ सक्रिय है। वार्डों से लेकर ओपीडी तक ये दलाल मरीजों को सस्ती और अच्छी जांच का लालच देकर बाहर की लैब में सैंपल भिजवाते हैं। स्टाफ की मिलीभगत से चल रहा यह रैकेट पहले भी कई बार पकड़ा जा चुका है, लेकिन कार्रवाई के बावजूद नहीं थम रहा।
विस्तार: कानपुर के हैलट अस्पताल में पैथोलॉजी दलालों का जाल इतना गहरा है कि बार-बार पकड़े जाने के बाद भी ये बेखौफ घूम रहे हैं। मेडिसिन, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स और जच्चा-बच्चा वार्डों के साथ-साथ ओपीडी के बाहर ये दलाल मरीजों और तीमारदारों को फुसलाते हैं। सस्ती दरों पर बेहतर जांच कराने का झांसा देकर वे ब्लड सैंपल, पर्चे और आधार कार्ड लेकर बाहर की प्राइवेट पैथोलॉजी लैब में भिजवाते हैं, जहां से कमीशन कमाते हैं।
पिछले साल दिसंबर में प्राचार्य डॉ. संजय काला ने खुद मेडिसिन वार्ड से सैंपल ले जाते एक दलाल को पकड़ा था। उसके पास मरीजों के ब्लड सैंपल, पर्चे और आधार कार्ड मिले थे। दो साल पहले मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भी छापे में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के पास दलालों के कार्ड बरामद हुए थे, जिसके बाद कुछ कर्मचारियों को हटाया गया। इमरजेंसी और जच्चा-बच्चा अस्पताल में भी दलाल पकड़े गए, एक को तो पुलिस के हवाले किया गया था।
तीन महीने पहले पैथोलॉजी के बाहर एक व्यक्ति को मरीजों को लुभाते पकड़ा गया, जिसने पूछताछ में एक पैरा मेडिकल छात्र का नाम लिया। सूत्रों के मुताबिक, कुछ पैरा मेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारी इन दलालों से मिलकर पैसा कमाते हैं।
कॉलेज प्रबंधन के अधिकारी अब संदिग्धों की सूची तैयार कर रहे हैं, लेकिन मरीजों का कहना है कि दलालों का यह मकड़जाल टूटने का नाम नहीं ले रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त निगरानी और कार्रवाई से ही इस रैकेट पर लगाम लग सकती है, वरना गरीब मरीजों का शोषण जारी रहेगा।

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