सार: बांदा की विशेष पॉक्सो अदालत ने 24 वर्षीय अमित रैकवार को छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के जघन्य अपराध में मौत की सजा सुनाई है। न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 46 पन्नों के फैसले में कहा- “दोषी को मरते दम तक फंदे पर लटकाया जाए।” चार्जशीट दाखिल होने के मात्र 56 दिनों में फैसला आने से यह मामला तेज न्याय का उदाहरण बन गया है।
विस्तार: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में कालिंजर थाना क्षेत्र के एक गांव में 25 जुलाई 2025 को हुई इस दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। आरोपी अमित रैकवार ने स्कूल से लौट रही मासूम को गुटखा मंगाने के बहाने फुसलाकर अपने घर ले गया और वहां दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं। मेडिकल जांच में बच्ची के शरीर पर दांतों के काटने के निशान और कई गंभीर चोटें मिलीं, जिससे डॉक्टर भी विचलित हो गए थे।
वारदात के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया। 7 अक्टूबर 2025 को चार्जशीट दाखिल की गई। 12 नवंबर से शुरू हुए मुकदमे में 10 गवाह पेश किए गए, जिनमें डॉक्टरों का पैनल, फॉरेंसिक और डीएनए रिपोर्ट शामिल थीं। बचाव पक्ष की सबूतों की कमी वाली दलीलों को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
मंगलवार को विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस मानते हुए मौत की सजा सुनाई और 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। फैसला सुनाते हुए जज ने कलम की निब तोड़ी, जो मौत की सजा में परंपरा का प्रतीक है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराधियों के लिए समाज में कोई जगह नहीं।
पीड़ित परिवार ने फैसले पर सुकून जताया, लेकिन कहा कि पूरा न्याय तब मिलेगा जब सजा पूरी हो। वहीं, आरोपी पक्ष से कथित धमकियों की वजह से परिवार में दहशत है।
यह फैसला बच्चों के खिलाफ अपराधों में तेज न्याय और कड़ी सजा का मजबूत संदेश देता है।

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