आजादी के बाद 80 के दशक में लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए पांच महत्वपूर्ण संशोधनों पर मुहर लगी। संविधान संशोधन अधिनियम, 1989 के बाद पहली बार 18 साल के युवाओं को मतदान का अधिकार प्राप्त हुआ। इससे पहले 21 साल वाले ही मतदान कर सकते थे।
चुनाव कार्यों में लगे कर्मियों को भी वोट डालने सहित कई स्थायी अधिकार प्राप्त हुए। सरकार ने भी संविधान संशोधन किए। मतदान में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने संविधान के 61वें संशोधन अधिनियम, 1989 के तहत अनुच्छेद 326 में संशोधन कर मतदान करने की आयु घटाकर 18 वर्ष कर दी।
इससे युवाओं के मतदान में 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई। चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी बाहरी जिलों में ड्यूटी के लिए जाते हैं। 1990 से पहले इनको आयोग के अधीन माना जाता था। इस संशोधन से चुनाव कार्यों में लगे अधिकारियों व कर्मचारियों को चुनाव की अवधि के दौरान आयोग में प्रतिनियुक्ति पर माना जाने लगा। इसके साथ ही उन्हें मतदान का अधिकार प्राप्त हुआ।

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