गोरखपुर
विश्व प्रसिद्ध योग गुरु परमहंस योगानंद की 133वीं जयंती सोमवार को बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। सुबह 8 बजे घोष कंपनी चौराहे से भव्य प्रभात फेरी निकाली गई, जिसमें सैकड़ों अनुयायी शामिल हुए। ‘जय गुरु… जय गुरु…’ के जयकारों के बीच परमहंस योगानंद की पालकी को कंधों पर उठाकर अनुयायी कोतवाली मुफ़्तीपुर स्थित उनकी जन्मस्थली तक पहुंचे। रास्ते भर पुष्प वर्षा कर अनुयायियों ने अपनी आस्था प्रकट की।
प्रभात फेरी के दौरान स्थानीय लोग भी बड़े आस्था भाव से दर्शन कर रहे थे। जन्मस्थली पहुंचने पर प्रवेश द्वार पर परमहंस योगानंद का ध्यान लगाया गया, इसके बाद अनुयायी अंदर प्रवेश किए। इस अवसर पर योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ अमेरिका से स्वामी विश्वानंद गिरी और उनके साथ चार साध्वियां, तथा रांची से स्वामी सौम्यानंद गिरी विशेष रूप से शामिल हुए।
परमहंस योगानंद ने वर्ष 1917 में भारत में योगदा सत्संग सोसाइटी की स्थापना की थी, जो आज भी आश्रमों, ध्यान केंद्रों, शिविरों और प्रकाशनों के माध्यम से उनकी शिक्षाओं का प्रसार कर रही है। क्रिया योग सहित योगदा ध्यान-पद्धति के जरिए देश-विदेश के साधक उनकी शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर अंतःस्थ शांति और दिव्य अनुभव प्राप्त कर रहे हैं।
यह आयोजन योग गुरु की शिक्षाओं और योग के प्रचार-प्रसार को याद करने का एक भावपूर्ण अवसर बना। जन्मस्थली पर पूजा-अर्चना और ध्यान सत्र भी आयोजित किए गए।

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