February 25, 2026

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वोट पर होगी बनभूलपुरा पुनर्वास की जबरदस्त चोट, 2027 के विधानसभा चुनाव में दिखेगा राजनीतिक बदलाव

Banbhulpura rehabilitation will have a huge impact on the vote in haldwani

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे भूमि से अगर अतिक्रमण हटता है, तो 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में हल्द्वानी विधानसभा सीट में व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बदलाव आ सकते हैं। यहां करीब पांच हजार से अधिक परिवार रहते हैं जिनका पुनर्वास मुख्य चुनावी मुद्दा बनकर उभरने और मतदाता धुव्रीकरण की भी प्रबल संभावना है। पुनर्वास में पीएम आवास, मुआवजा और कार्रवाई में देरी या सख्ती, सत्ताधारी दल और विपक्ष के लिए हार-जीत का प्रमुख कारण बन सकती है। राजनीतिक जानकारों का भी मानना है कि पुनर्वास के बाद यहां से कांग्रेस के परंपरागत मतदाताओं की संख्या कम हो सकती है। 2022 के चुनावों में यहां से कांग्रेस को 36 हजार से अधिक मत मिले थे। अधिकतर इस क्षेत्र में किराएदार हैं। अतिक्रमण हटने या पुनर्वास के बाद यहां से करीब 15 से 18 हजार मतदाता सीधे तौर पर कम हो जाएंगे। भाजपा-कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के लोग मंगलवार को इस मुद्दे पर बातचीत करते दिखे। अब पुनर्वास का किसे किसे नफा और किसे नुकसान यह भविष्य के गर्त में है

परिवारों का असंतोष और संतुष्टि वोटिंग पैटर्न को करेगी प्रभावित

अनारक्षित हल्द्वानी सीट पर लंबे समय से कांग्रेस का ही वर्चस्व रहा है। इसमें बनभूलपुरा क्षेत्र से करीब 36 हजार मतदाता जीत और हार का अंतर करने में अहम भूमिका निभाते आए हैं। 2017 तक स्व. इंदिरा हृदयेश की लगातार जीत और उसके बाद 2022 के चुनाव में उनके पुत्र सुमित हृदयेश ने यहां भाजपा प्रत्याशी को हराकर कांग्रेस का वर्चस्व बनाए रखा। सुमित ने हल्द्वानी विधानसभा सीट पर एक लाख से अधिक मतदाताओं में 50,116 मत प्राप्त कर मुख्य प्रतिद्वंदी भाजपा प्रत्याशी को 7814 मतों से पराजित किया था। इनमें बनभूलपुरा के वोट निर्णायक बने। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई टिप्पणी से ईद के बाद यहां पुनर्वास कैंप लगाने और पीएम आवास देने के कामों में तेजी आ सकती है। इसके साथ ही यह मुद्दा विधानसभा चुनाव का प्रमुख मुद्दा फिर भी बना रहेगा और पांच हजार से अधिक परिवारों का असंतोष और संतुष्टि हल्द्वानी विधानसभा में वोटों के गणित को जरूर प्रभावित करेगी।

मानवीय दृष्टिकोण को कोर्ट ने सबसे ऊपर रखा है। राज्य सरकार की तरफ से योजनाओं के बारे में कोर्ट को बताया गया है। यहां बसे 5000 से ज्यादा परिवारों को उसका लाभ किस योजना में देंगे, इसका भी पता चलेगा। यह अंतरिम आदेश है। इसका सभी को पालन करना चाहिए। सुमित हृदयेश विधायकसुप्रीम कोर्ट पुनर्वास की बात कर रहा है। मेरा कहना इतना ही है कि सरकार पुनर्वास का काम ईमानदारी से करे और किसी के साथ भेदभाव न करे। ललित जोशी, राज्य आंदोलनकारी।

चुनाव की चिंता नहीं है, हमें गरीब आदमी की चिंता है, उसे न्याय मिलना चाहिए। हमें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है कि सभी को न्याय मिलेगा। राहुल छिमवाल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष नैनीताल।

अतिक्रमण को लेकर आदेश अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन अगर यहां रेलवे का विस्तार होता है तो पूरे कुमाऊं के लोगों को और रेलवे को बड़ा फायदा पहुंचेगा। प्रताप बिष्ट, भाजपा जिलाध्यक्ष, नैनीताल