
रमजान का चांद अगर बुधवार को दिखा तो बुधवार रात से ही तरावीह शुरू हो जाएंगी और पहला रोजा बृहस्पतिवार का होगा। अगर चांद नहीं दिखा तो तरावीह बृहस्पतिवार से शुरू होंगी और पहला रोजा शुक्रवार का होगा। ईद 29 रोजों या 30 रोजों के बाद होती है। अगर ईद 30 रोजों के बाद हुई तो इस बार रमजान में पांच जुमे होंगे। पहला जुुमा 20 फरवरी, दूसरा 27 फरवरी, तीसरा 6 मार्च, चौथा 13 मार्च और पांचवा जुमा 20 मार्च का होगा। 29 रोजे हुए तो चार जुमे होंगे और अलविदा जुमा 13 मार्च का होगा। 30 रोजे हुए तो पांच जुमे होंगे और अलविदा जुमा 20 मार्च का होगा।
नायब शहर काजी जैनुर राशिदीन सिद्दीकी ने सभी मुस्लिमों से गुजारिश की है कि रोजों का खास एहतमाम करें। हर काम अल्लाह को राजी करने के लिए करें। रोजा रखने के साथ-साथ अपनी जबान, आंख, हाथ और पैर को भी महफूज रखें। जबान से कोई गलत लफ्ज न बोलें, आंख से कोई गलत चीज न देखें, हाथ से कोई गुनाह वाला काम न करें और पैरों से गुनाहों की तरफ न जाए। अपने आप को गुनाहों से बचाएं।
मौलाना मशहूदुर्रहमान शाहीन जमाली चतुर्वेदी ने बताया कि रमजान का महीना बरकतों वाला महीना है। इस महीने में अल्लाह की तरफ से अपने नेक बंदों के लिए रोजा एक खास तोहफा है। जब रमजान का महीना आता है तो जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। अल्लाह रमजान के महीने में पहले अशरे के दस दिनों में अपने नेक बंदों पर रहमत नाजिल करता है। दूसरे अशरे के दस दिनों में अल्लाह अपने नेक बंदों की मगफिरत करता है। तीसरे अशरे के दस दिनों में अल्लाह अपने नेक बंदों को दोजख से आजादी देता है।
मौलाना कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने बताया कि रमजान का चांद दिखाई देने पर शाही जामा मस्जिद में पिछले 45 वर्षों की परंपरा के अनुसार इस साल भी छह रोजा शबीना होगा। शाही जामा मस्जिद में ईशा की नमाज रात 8:15 बजे होगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे मस्जिद में शांति और अनुशासन के साथ आएं। किसी भी तरह की हुड़दंग या नारेबाज़ी न करें। आसपास के लोग पैदल आएं क्योंकि पार्किंग की समस्या रहती है। उन्होंने बताया कि शाही ईदगाह में भी पांच रोजा शबीना होगा। शाही ईदगाह में ईशा की नमाज रात 8:00 बजे होगी।
मौलाना मशहूदुर्रहमान शाहीन जमाली चतुर्वेदी ने बताया कि रमजान का महीना बरकतों वाला महीना है। इस महीने में अल्लाह की तरफ से अपने नेक बंदों के लिए रोजा एक खास तोहफा है। जब रमजान का महीना आता है तो जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। अल्लाह रमजान के महीने में पहले अशरे के दस दिनों में अपने नेक बंदों पर रहमत नाजिल करता है। दूसरे अशरे के दस दिनों में अल्लाह अपने नेक बंदों की मगफिरत करता है। तीसरे अशरे के दस दिनों में अल्लाह अपने नेक बंदों को दोजख से आजादी देता है।
मौलाना कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने बताया कि रमजान का चांद दिखाई देने पर शाही जामा मस्जिद में पिछले 45 वर्षों की परंपरा के अनुसार इस साल भी छह रोजा शबीना होगा। शाही जामा मस्जिद में ईशा की नमाज रात 8:15 बजे होगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे मस्जिद में शांति और अनुशासन के साथ आएं। किसी भी तरह की हुड़दंग या नारेबाज़ी न करें। आसपास के लोग पैदल आएं क्योंकि पार्किंग की समस्या रहती है। उन्होंने बताया कि शाही ईदगाह में भी पांच रोजा शबीना होगा। शाही ईदगाह में ईशा की नमाज रात 8:00 बजे होगी।

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