
मेरठ निवासी देवेंद्र ने बताया कि उनके फुफेरे भाई नरेंद्र रोज गांव से साइकिल से ड्यूटी जाते थे। हादसे के समय पीछे आ रहे गांव के ही एक व्यक्ति ने नरेंद्र को पहचानकर सूचना दी। 15-20 मिनट में परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। इसी बीच पुलिस भी पहुंची। देवेंद्र का आरोप है कि पुलिस ने आनन-फानन शव को सील करा दिया। आरोपी वाहन चालक की तलाश के लिए प्रयास तक नहीं किए। इससे नाराज लोगों ने शव उठाने नहीं दिया। हंगामा बढ़ने पर एसीपी शालीमार गार्डन मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से बात की और जल्द ही वाहन चालक को गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया।
नरेंद्र के परिवार में पत्नी रविता, नौ वर्षीय पुत्र शिवा, डेढ़ वर्षीय पुत्र माधव, माता-पिता व चार भाई हैं। पति का शव देखकर रविता बेसुध हो गईं।परिवार व गांव की अन्य महिलाओं ने उन्हें संभाला। होश आने पर वह शव के पास बैठकर रोती-बिलखती रहीं।
सुबह करीब 6:30 बजे से शुरू हुए प्रदर्शन के कारण मालवाहक, सवारी और निजी वाहन जाम में फंस गए। पुलिस ने मार्ग को वन-वे कर धीरे-धीरे यातायात बहाल कराया, लेकिन 10:30 बजे तक सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।
सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। परिजनों से अभी तहरीर नहीं मिली है। सर्विलांस व थाना पुलिस की टीम आरोपी वाहन चालक की तलाश कर रही है। जल्द गिरफ्तारी कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
-अतुल कुमार सिंह, एसीपी शालीमार गार्डन
