
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने कैंचीं धाम और आसपास हो रहे निर्माण और आर्थिक अनियमितता के मामले में स्वत: संज्ञान लेने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने अधिवक्ता धर्मेंद्र बर्थवाल को मामले में एम एकस क्यूरी(न्याय मित्र) बनाया गया है।मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई
मामले के अनुसार हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए पत्र के आधार पर कैंचीं धाम पर सुओ मोटो (स्वतः संज्ञान) ले लिया था। कैंचीं धाम और आसपास पिछले कुछ वर्षों में बाबा के भक्तों की अत्यधिक भीड़ आने से वहां कई तरह की अनियमितताएं होने लगी हैं। इसमें ट्रैफिक और अतिक्रमण मुख्य पहलू हैं। इसके अलावा यहां खुले व्यवसाय के द्वारा और भक्तों की भीड़ से सीवरेज, नो पार्किंग नए व्यावसायिक निर्माण आदि परेशानी का सबब बना हुआ है। कोर्ट ने पिथौरागढ़ निवासी ठाकुर सिंह डसीला के पत्र पर स्वत: संज्ञान लिया था।
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