डॉ. मुनि ने कहा कि प्रवचन सुनने वाला प्रत्येक व्यक्ति परिवर्तित नहीं होता, प्रवचन सुनने की भीड़ तो है पर हजारों आदमी में एक भी व्यक्ति परिवर्तित हो गया तो संतों का संदेश सफल हो जाता है। मैं ठीक हूं, मैं ही ठीक हूं।
ऐसा अभिमान मत पालो। मैं ही नाश का कारण है, हम लोग सांप्रदायिक बन गए हैं। हमारी सोच की सकारात्मकता सही है तो हमें कोई दुख नहीं दे सकता। सुविधाओं में हम सुख खोज रहे है। कहा कि समाज में सबसे पहले सुधार के लिए आहार शुद्धि जरूरी है।
बताया कि वह आठ माह पदयात्रा और चार माह उपवास रखते हैं। 36 घंटे मेें एक बार भोजन करता हूं। स्वागत करते वालों में रामबचन यादव, बड़राव ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि आद्याशंकर मिश्रा समेत आदि लोग रहे।