
कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के प्रभारी और वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार सिंह ने बताया कि बैंगन की पंत सम्राट स्वर्ण शक्ति, टमाटर की पूसा रोहिणी व अर्का विकास, मिर्च की पूसा ज्वाला, खीरा की पूसा उर्वर किस्में गर्मी सहन करने वाली और उपज अधिक देने वाली हैं।
फरवरी में बैंगन, टमाटर, मिर्च एवं शिमला मिर्च की पौध तैयार करने को नर्सरी डाली जा सकती है। लौकी, तोरई, करेला, कडू की बोवाई की जा सकती है। इसके लिए भी यह समय अच्छा है। सलाद के लिए खीरा और ककड़ी की भी सीधी बोवाई हो सकती है।
वैज्ञानिक डॉ. जीतेंद्र कुमार कुशवाहा ने बताया कि इस समय तापमान लगभग 20 से 25 डिग्री सेल्सियस रहता है। हल्की ठंडी होने के कारण पौधों की शुरुआती बढ़त के लिए सबसे उपयुक्त होता है। फरवरी में बोई गई सब्जियां मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत तक बाजार में आ जाती हैं। यही वह समय होता है, जब गर्मी बढ़ने लगती है तो हरी सब्जियों की मांग और बढ़ जाती है।