लखनऊ। प्यार, धोखा, रहस्य, रोमांच, जिरह और सबूतों की परतों में उलझा नाटक ‘सच कहें तो’ जब मंच पर शुरू हुआ तो कहानी के हर मोड़ के साथ दर्शकों की जिज्ञासा और रोमांच भी बढ़ता चला गया। शनिवार शाम राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में अनुकृति रंगमंडल कानपुर के कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय से नाटक को जीवंत बना दिया। डॉ. ओमेंद्र कुमार के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक की कहानी एक महिला की हत्या से शुरू होकर अदालत की तीखी बहसों तक सधे हुए अंदाज में आगे बढ़ती है।
उदय नारकर के मराठी नाटक ‘खरं सांगायचं तर’ के हिंदी रूपांतरण (डॉ. वसुधा सहस्त्रबुद्धे) को ‘सच कहें तो’ के रूप में मंचित किया गया। प्रस्तुति में दर्पण और सत्यपथ संस्थाओं का सहयोग रहा। कहानी में धनाढ्य अविवाहित महिला शिरीन वाडिया अपनी सहयोगी सरस्वती बाई के साथ रहती है। नितिन सावरकर से उसकी मुलाकात के बाद घटनाएं रहस्यमय मोड़ लेती हैं और शिरीन की हत्या हो जाती है। शक की सुई नितिन पर जाती है और अदालत में शुरू होती है सबूतों व बयानों की जंग।
मुकदमे के दौरान सामने आए पत्र कहानी की दिशा बदल देते हैं और नितिन अदालत से रिहा हो जाता है, लेकिन अंतिम दृश्य में खुलासा होता है कि हत्या उसी ने की थी। नाटक यहीं खत्म नहीं होता। अंतिम मोड़ पर उसकी पत्नी आयशा ही उसकी हत्या कर देती है, जिससे पूरा कथानक चौंकाने वाले निष्कर्ष तक पहुंचता है।
नाटक में संध्या सिंह, दीपिका सिंह, महेंद्र धुरिया, विजय कुमार, विजयभान और सम्राट ने प्रभावी अभिनय किया। संगीत आकाश शर्मा का, मंच व्यवस्था आकाश, विजय और सम्राट की तथा प्रकाश परिकल्पना कृष्णा सक्सेना की रही। इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी राधेश्याम सोनी, दर्पण लखनऊ के सचिव विवेक श्रीवास्तव, मोहम्मद हफीज, करुणा सागर और मुकेश वर्मा सहित बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
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