
घर बैठे नौ राज्यों के 14 नामी विश्वविद्यालय की डिग्री और डिप्लोमा महज सात दिन में दिलाने वाला आरोपी शैलेंद्र कुमार ओझा फिलहाल जेल में है। वह इतने साल तक बिना किसी शिकायत और पुलिस की नजर में आए सिर्फ इसलिए खेल करता रहा, क्योंकि उसने और उसके साथियों ने अलग ही कार्यशैली अपना रखी थी। हर कार्य होने के बाद ही राशि ली जाती थी। केवल पोस्ट डेटेट चेक लिया जाता था। रुपये मिलने के बाद ही उसे लौटा देते थे।
छापे के दौरान कई पोस्ट डेटेड चेक मिलीं थीं
ग्राहकों को भरोसा दिया जाता था कि काम होने के बाद नकद भुगतान होने पर उन्हें मार्कशीट या डिग्री मिल जाएगी। उस समय उन्हें चेक लौटा दी जाएगी। चेक सिर्फ गारंटी के तौर पर ली जाती थी। इसे देने में ग्राहक भी कोई आपत्ति नहीं करते थे। इसी तरह आरोपी शैलेंद्र भी विश्वविद्यालय के बाबुओं को लाखों रुपये के ब्लैंक चेक देता और बाद में उन्हें नकद भुगतान करता। पुलिस को जूही गौशाला स्थित उसके कार्यालय में छापे के दौरान कई पोस्ट डेटेड चेक मिलीं थीं
पांच टीमों में बंटकर काम करेगी एसआईटी
किदवई नगर पुलिस ने मार्कशीट खरीदे बेचे जाने के गिरोह का राजफाश किया है, लेकिन प्रकरण की जांच 14 सदस्यीय एसआईटी को मिली है। यह पांच टीमों में बंटकर जांच करेगी। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने शुक्रवार को एसआईटी का गठन किया। नेतृत्व एडीसीपी साउथ योगेश कुमार करेंगे। टीम में उनके अलावा एक एसीपी और क्राइम ब्रांच के तीन इंस्पेक्टर शामिल है, जबकि छह सब इंस्पेक्टर और तीन सिपाही भी इसमें शामिल है।
सदस्यों को नहीं पता थी एक-दूसरे की जिम्मेदारियां
मार्कशीट और डिग्रियां बेचने के इस खेल में गिरोह के सभी सदस्यों के लिए शैलेंद्र ने अलग भूमिका तय कर रखी थी। हर व्यक्ति को एक या एक या दो यूनिवर्सिटी व बोर्ड की जिम्मेदारी दी गई थी। कौन किस बाबू से काम कराता है। यह या तो उस व्यक्ति को पता होता या सिर्फ शैलेंद्र को । पुलिस के अनुसार अश्वनी को मेडिकल की डिग्रियां तैयार कराने का काम दिया गया था। जबकि नागेंद्र बीकॉम, बीएससी, एमएससी, एमबीए की डिग्रियां बनवाता था।
ये डिग्रियां कराते थे उपलब्ध
एलएलबी की डिग्री और बोर्ड से हाई स्कूल व इंटरमीडिएट की मार्कशीट बनवाने का जिम्मा जोगेंद्र के पास था। अलीगढ़ स्थित मंगलायतन यूनिवर्सिटी से मनचाही डिग्री बनवाकर लाने का काम मयंक भारद्वाज करता था। मनीष फरीदाबाद स्थित लिंग्या यूनिवर्सिटी और विनीत हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी का काम देखता था। विनीत मंगलायतन यूनिवर्सिटी के भी संपर्क में था।छतरपुर की श्रीकृष्ण विश्वविद्यालय का काम शुभम दुबे और गौतम संभालते थे। मणिपुर स्थित एशियन यूनिवर्सिटी से डिग्रियां और मार्कशीट उपलब्ध कराना सेखू उर्फ ताबिश के जिम्मे था। ईटानगर स्थित हिमालयन यूनिवर्सिटी की डिग्रियां नागेंद्र उपलब्ध कराने का काम करता था।
