
यूपी के बहराइच में सरकारी किताबें कबाड़ी को बेचने के मामले में हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अब जांच में यह बात लगभग साफ हो गई है कि बेसिक शिक्षा विभाग के भंडार गृह से करीब 15,593 किताबें नदारद हैं। बड़ा सवाल यह है कि कबाड़ी की दुकान पर मिलीं किताबें क्या इसी गोदाम की थीं या फिर किसी और जगह से लाई गई थीं। इसी बिंदु पर जांच अब भी उलझी हुई है
संविदा समाप्त कर दी गई
गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद अनुचर आलोक कुमार और शफीक अहमद को निलंबित कर दिया गया। साथ ही अनुदेशक अतुल कुमार सिंह, सामुदायिक सहभागिता समन्वयक आशुतोष सिंह और स्पेशल एजुकेटर दीपक कुमार की संविदा समाप्त कर दी गई।
प्रभारी सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी वीरेश कुमार वर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी नगर डाली मिश्रा और खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय रंजीत कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि 15,593 किताबें भंडार गृह से नदारद हैं। इससे विभागीय अधिकारी सकते में है। अब यह भी जांच का विषय है कि ट्रक पर लदीं किताबें बहराइच की थीं या किसी अन्य जिले से लाई गई थीं। इस मामले में बीएसए आशीष सिंह का कहना है कि गायब किताबों का सत्यापन किया जा रहा है।
कबाड़ी और ट्रक चालक को खोजने में पुलिस बेहाल
सरकारी किताबों की खरीद-फरोख्त के आरोपी कबाड़ी दिलशाद और मुरादाबाद के ट्रक चालक 16 फरवरी से लापता हैं। पुलिस ने उनकी तलाश में तीन टीमें गठित की हैं। रामगांव थानाध्यक्ष गुरुसेन सिंह का कहना है कि पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं, लेकिन दोनों का अब तक सुराग नहीं लग सका है। उन्होंने कहा कि सर्विलांस टीम का भी सहारा लिया जा रहा है।
