लखनऊ। खानपान में स्वाद के साथ ही घर जैसी शुद्धता और पौष्टिकता भी मिले तो यह आज के समय में सोने पर सुहागा है। विकासनगर में एक समूह इसी शुद्धता को न सिर्फ घर-घर पहुंचाने का काम कर रहा है बल्कि घरेलू, कम शिक्षित और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को रोजगार मुहैया कराकर उन्हें स्वावलंबन की राह भी दिखा रहा है। खास बात यह है कि मुनाफे की आय का एक बड़ा हिस्सा गरीब बच्चों की पढ़ाई और नेत्र रोगियों के इलाज पर भी खर्च किया जाता है।
राजधानी के विकासनगर में रेनु अग्रवाल ने करीब आठ साल पहले शक्ति समूह की स्थापना की थी। यहां सभी प्रकार की नमकीन से लेकर गुझिया, मेवा लड्डू, अलसी के लड्डू, अचार, पापड़, मसाले, आटा और बेसन को तैयार किया जाता है। रेनु अग्रवाल ने बताया कि समूह में करीब 20 ऐसी महिलाओं को रोजगार दिया गया जो आर्थिक रूप से कमजोर थीं। स्वाद और शुद्धता की वजह से धीरे-धीरे उत्पादों की लोकप्रियता के साथ बिक्री बढ़ने लगी। इससे होने वाली आय से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ।
होली और दीपावली पर बहुत सी महिलाएं हमारे समूह से जुड़कर काम करती हैं क्योंकि इतनी ज्यादा मांग को पूरा कर पाना 20-25 महिलाओं के बस की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य है लोगों को शुद्ध और बिल्कुल घर जैसे स्वादिष्ट व पौष्टिक पकवान उपलब्ध करवा सकें क्योंकि आज की भागमभाग भरी जिंदगी में जब पति-पत्नी दोनों ही कामकाजी हैं तो उनके घर में बाजार से ही ज्यादातर पकवान आते हैं। यहां तक कि विदेश में रहने वाले बहुत से लोग हमारे उत्पाद मंगवाते हैं।
शक्ति समूह की संस्थापक रेनु अग्रवाल ने बताया कि उत्पादों से होने वाले मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा ऐसे बच्चों की शिक्षा पर खर्च किया जाता है जो आर्थिक रूप से काफी कमजोर हैं। उन्होंने बताया कि प्रति माह कल्याणं करोति संस्था के माध्यम से एक नेत्र रोगी के ऑपरेशन का खर्च भी हमारे समूह की ओर से वहन किया जाता है।