March 3, 2026

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राजस्थान-वाराणसी से मंगा रहे मिलावटी रसगुल्लेरोजाना खपा रहे 50 क्विंटल

Adulterated rasgullas are arriving daily from Rajasthan and Varanasi in Gorakhpur news

होली के त्योहार को देखते हुए शहर के बाजारों में मिठाइयों की मांग तेज हो गई है। इसी के साथ मिलावटखोरों की सक्रियता भी बढ़ गई है। खोआ मंडी व अन्य बाजारों में राजस्थान और वाराणसी से मिलावटी रसगुल्ले और गुलाब जामुन की खेप पहुंच रही हैं।

150 रुपये प्रति किलो बिक रहे इस रसगुल्ले की रोजाना करीब 50 क्विंटल खपत बताई जा रही है। हालांकि, यह सस्ती मिठाई त्योहार में आपकी और आपके मेहमानों की सेहत बिगाड़ सकती है।
सूत्रों के मुताबिक इस समय खोआ मंडी में सस्ते रसगुल्ले और गुलाब जामुन की भरमार है। राजस्थान और वाराणसी से मंगाया जा रहा यह मिलावटी रसगुल्ला 150 रुपये किलो के रेट पर बेचा जा रहा है। खोआ मंडी में 200 पीस का एक डिब्बा 1300 से 1500 रुपये में उपलब्ध है।

खोआ मंडी के एक व्यापारी ने बताया कि होली में मांग खपत बढ़ने की वजह से मुनाफाखोर वाराणसी और राजस्थान सस्ता माल मंगाकर खपा रहे हैं। बताया जा रहा है कि बचे व खराब हो चुके रसगुल्ले को रिसाइकिल कर उसमें घटिया मैदा, मिल्क पाउडर, अरारोट और सूजी मिलाकर दोबारा तैयार किया जा रहा है।

सत्रों का कहना है कि धंधेबाज गुलाब जामुन तलने के लिए पाम ऑयल का उपयोग करते हैं और इसे गाढ़ी चाशनी में डुबोकर बाजार में उतार देते हैं। त्योहारों में जरूरत के मुताबिक इसे लोग बाजार से 150 रुपये किलो खरीद रहे हैं, सस्ते में मिल रही यह मिठाई खाने वाले को बीमार कर सकती है।
मिठाई के कारोबारी देवा केशवानी ने बताया कि शुद्ध रसगुल्ला 480 रुपये किलो और 20 रुपये प्रति पीस बिक रहा है। सेहत को लेकर जागरूक लोग इसे खरीद रहे हैं। 150 रुपये किलो बिक रहा रसगुल्ला मिलावटी ही होगा, क्योंकि 150 रुपये में तो शुद्ध रसगुल्ले की लागत भी नहीं आएगी और कोई भी व्यापारी घाटे का व्यापार नहीं करता है।
मिलावटी खोआ वाराणसी और मथुरा से मंगाया
होली पर वाराणसी और मथुरा से मिलावटी खोआ भी बड़ी मात्रा में मंडी में पहुंचा है। अनुमान है कि त्योहार पर करीब 100 क्विंटल खोआ की खपत होगी। तीन प्रकार का खोआ इस समय बाजार में बिक रहा है जिससे लोग भ्रमित हो जा रहे हैं। धंधेबाज तीन तरह के खोआ में ज्यादा ब्राउन वाले को मथुरा का बताकर बेच रहे हैं जिसकी कीमत 400 रुपये रखी है।
वहीं, वाराणसी से आने वाला खोआ हल्का गुलाबी है जिसको अच्छा बताकर 360 रुपये किलो बेच रहे हैं। स्थानीय के नाम पर सफेद रंग का खोआ 280 रुपये में बेच रहे हैं। दूध की कीमत के हिसाब से देखें तो साफ हो जाता है कि बाजार में सस्ते में बिक रहा खोआ भी मिलावटी ही है।

सेहत पर पड़ सकता है बुरा असर
जिला अस्पताल के डॉ. दुर्गेश कुमार के अनुसार पाउडर और अरारोट से बने रसगुल्ले और गुलाब जामुन खाने से आंतों और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है। अधिक सेवन से किडनी और लीवर प्रभावित होने का भी खतरा रहता है।

ऐसे करें असली-नकली खोआ की पहचान
खोआ व्यवसायी समता अग्रवाल ने बताया कि असली खोआ हथेली पर रगड़ने से घी छोड़ता है और दूध की प्राकृतिक सुगंध देता है। इसका रंग हल्का क्रीम और बनावट दानेदार व मुलायम होती है। इसके विपरीत मिलावटी खोआ अधिक सफेद, अस्वाभाविक रूप से चिकना या चिपचिपा होता है। उसमें स्टार्च या तेल जैसी गंध आ सकती है और स्वाद फीका या हल्का कसैला लगता है।

त्योहार की खुशियों में सेहत से समझौता न करें। खरीदारी करते समय मिठाइयों की गुणवत्ता और कीमत पर विशेष ध्यान दें। हमारी टीम लगातार छापेमारी कर रही है। नमूने लेकर कार्रवाई भी किया जा रहा है: डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा