
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी के सदस्य जगनैन सिंह नीटू ने कहा कि सिख परंपरा में रविदास का महत्व गुरु तुल्य है। संत शिरोमणि रविदास आध्यात्म की उच्च अवस्था के महापुरुष के साथ बड़े समाज सुधारक एवं सामाजिक बराबरी के प्रबल पक्षधर थे। उनकी इसी विशेषता के चलते पंचम सतगुरु अर्जन देव ने उनकी चालीस रचनाओं को गुरु ग्रंथ साहिब में स्थान देकर उनका सदैव अनुसरण करने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंध समिति ने रविदास मंदिर अलवापुर के समस्त पदाधिकारियों को विशेष रूप से आमंत्रित कर उनका सम्मान करते हुए गुरु के जयंती पर्व की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में हजूरी रागी भाई मनप्रीत सिंह एवं भाई तेजिंदर सिंह अमृतसरी के जत्थे ने रविदास की रचनाओं का मधुर गायन तथा हेड ग्रंथी ज्ञानी राज सिंह ने अरदास कर संत रविदास को नमन किया। कार्यक्रम के समापन पर गुरुद्वारा समिति के अध्यक्ष जसपाल सिंह ने सभी अतिथियों व संगत के प्रति आभार ज्ञापित किया।
इस अवसर पर मैनेजर रजिंदर सिंह, मंजीत सिंह, जगप्रीत सिंह सोनू, दौलतराम साधवानी, सूरज हिरवानी, बेअंत सिंह, अमित सिंह, सुरेश प्रसाद, बेनी प्रसाद, सोमई , संतराज भारती, सुरेंद्र भारती सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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