
वहां संजीव कुमार कुशवाहा लोगों को निवेश के बारे में समझा रहा था। जबकि अंकित श्रीवास्तव ने निवेशकों को स्कीम के लिए बुलाया था। पुलिस पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अधिक लाभ का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया।
पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी, विनियमित स्कीम पाबंदी अधिनियम समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई। दोपहर बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। थाना रामगढ़ताल पुलिस अब कॉल डिटेल और लैपटॉप के डिजिटल सबूतों के आधार पर गैंग के अन्य गुर्गों की पहचान और गिरफ्तारी में जुटी है।
गोपालगंज में डेयरी का काम करने वाले मनोज दीक्षित ने बताया कि इससे पहले उन्होंने मुंबई की एक कंपनी में रुपया लगाया था। जहां उनकी मुलाकात संजीव कुशवाहा से हुई थी। उस कंपनी में उनका सारा रुपया फंस गया। कुछ दिनों बाद संजीव कुशवाहा मिला तो उनसे अपना रुपया निकलवाने की बात कही।
उसने आश्वासन देकर गोरखपुर बुलाया। जहां वह बिटक्वाइन से संबंधित अपनी एक स्कीम के बारे में बता रहे थे। इसबीच पुलिस टीम वहां पहुंच गई। वहीं श्रवण कुमार से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि वह आयुर्वेदिक दवाओं का काम करते हैं जिसके संबंध में उनकी मुलाकात अंकित श्रीवास्तव से हुई थी।
लैपटॉप में मिले फोटोग्राफ और रुपये भेजने के स्क्रीनशॉट
बरामद लैपटॉप में फोटोग्राफ और क्रॉस क्रिएटिव एंड कान्सेप्ट फर्म में रुपये भेजने के स्क्रीनशॉट मिले। पुलिस ने इन सबूतों का रंगीन प्रिंटआउट निकाल कर साक्ष्य के तौर पर अपने पास रख लिया।
इन्वेस्ट के लिए वेबिनार का किया था आयोजन
क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्ट के लिए वेबिनार आयोजित किया गया था जिसमें सम्मिलित होने के लिए लोगों को बुलाया गया था। पुलिस ने वहां मौजूद लोगों से पूछा कि आपको किसने बुलाया था तो वहां मौजूद लोगों ने बताया कि अंकित श्रीवास्तव ने बुलाया था। अंकित श्रीवास्तव ने लोगों से कहा था कि एक अच्छी स्कीम आई है, जितनी जल्दी आप लोग रुपया लगाएंगे उतना अधिक लाभ होगा।
