
नगर निगम के सूजाबाद वार्ड स्थित डोमरी क्षेत्र में रविवार को नगर निगम ने एक घंटे में 251446 पौधे लगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। इन पौधों को लगे 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि क्षेत्र में छुट्टा पशुओं का भ्रमण करते वीडियो वायरल हो गया। वीडियो वायरल होते ही नगर निगम में खलबली मच गई और तत्काल मौके पर सुरक्षा गार्डों की तैनाती की गई।
वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि पौधरोपण क्षेत्र के कुछ हिस्सों में समुचित घेरेबंदी नहीं की गई थी, जिसके कारण पशु आसानी से भीतर प्रवेश कर गए। कई स्थानों पर पौधों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है।
दी चेतावनी
वीडियो वायरल होने के बाद से पौधरोपण स्थल पर सुरक्षा गार्डों की तैनाती कर दी गई है। किसी को भी उस ओर आने-जाने नहीं दिया जा रहा है। नगर निगम के जन संपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि ऑक्सीजन क्लब के रूप में विकसित हो रहे इस वन को नष्ट करने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकारी धन की बर्बादी का दावा निराधार है। मौके पर पांच सुरक्षा गार्डों की तैनाती कर दी गई है। पौधे को उखाड़ना, मिट्टी फेंकना या मवेशियों से नुकसान पहुंचाना एक गंभीर अपराध है। उन पर प्रशासन केस दर्ज कर कराएगा। वीडियो फर्जी है। मठ के कारण गेट नहीं लगाया गया था। सोमवार से गार्डों की तैनाती कर दी गई थी। अफवाह फैलाने वाले पर प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। – हिमांशु नागपाल, नगर आयुक्त
डोमरी में रविवार को पौधरोपण किया गया है। 15 दिन के अंदर 350 बीघे में जो पौधे लगाए गए हैं। उनके आसपास कटीले तार लगवाए जाएंगे। पूरे क्षेत्र में पौधे की सिंचाई के लिए अच्छी व्यवस्था की गई है। इससे काफी सहूलियत होगी। कब्जेदार अफवाह फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। – अशोक कुमार तिवारी, मेयर
हर महीने होगा 35 हजार लीटर जीवामृत का छिड़काव
डोमरी (सूजाबाद) में लगाए गए 2.51 लाख पौधों को जीवित रखने और उन्हें जंगल की शक्ल देने के लिए जमीन की उर्वरता पर विशेष काम किया जा रहा है। आमतौर पर खराब मानी जाने वाली मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए यहां मिट्टी रिपेयरिंग का बड़ा अभियान चलाया गया है, जिसमें चार फीट गहरी खुदाई कर 100 टन कोकोपिट और 250 टन गाय के गोबर की खाद का वैज्ञानिक मिश्रण तैयार किया गया है।
पौधों को नैसर्गिक खाद देने के लिए हर महीने 35,000 लीटर जीवामृत का छिड़काव किया जा रहा है। मियावाकी विशेषज्ञ विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि प्रक्रिया पहले छह महीने तक निरंतर चलेगी और अगले दो वर्षों तक अंतराल पर जारी रहेगी। जीवामृत मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाता है, जिससे पौधों की जड़ें तेजी से गहराई पकड़ती हैं।
इस समय वसंत के कारण पौधों से पत्ते झड़ना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसे अक्सर लोग पौधों का सूखना समझ लेते हैं, जबकि अंदरूनी तौर पर जड़ें मजबूत हो रही हैं। मार्च की गर्मी में पौधों की वृद्धि दर तेज करने के लिए यह पोषण और नमी का तालमेल सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सिंचाई के मोर्चे पर इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह ‘वॉटरप्रूफ’ बनाया गया है।
गर्मियों में पानी की किल्लत से निपटने के लिए परिसर में ही चार विशेष तालाब खोदे जाएंगे, जो भूजल स्तर को बनाए रखने के साथ-साथ आपातकालीन सिंचाई में मदद करेंगे। जल आपूर्ति के लिए दस बोरवेल स्थापित किए गए हैं और पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखने के लिए ड्रिप (टपक सिंचाई) और स्प्रिंकलर सिस्टम दोनों को एक साथ अपनाया गया है। इससे न केवल पानी की बचत हो रही है, बल्कि पौधों की पत्तियों पर जमा होने वाली धूल भी साफ होती रहती है।
