March 6, 2026

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300 लोगों की चटकीं हड्डियां, 150 के टूटे जबड़े, इनमें 40 साल तक के 250; ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी फुल

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रंगों के पर्व होली की मस्ती कई लोगों के लिए मायूसी में बदल गई। कोई सड़क पर शराब पीकर तेज रफ्तार में गाड़ी चलाते हुए गिर गया, तो कोई लड़ाई-झगड़े में घायल हो गया। कुछ लोग खड़ी गाड़ी या दीवार से टकरा गए।

होली के इस हुड़दंग का असर यह रहा कि पूर्वांचल के जिलों और बिहार आदि जगहों से 500 से अधिक लोग अलग-अलग कारणों से चोटिल होकर बीएचयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। इनमें आधे से अधिक की उम्र 20 से 40 वर्ष के बीच है, जबकि 40 से 55 वर्ष आयु वर्ग के भी करीब 100 लोग घायल हुए।

इनमें शराब पीकर तेज रफ्तार में वाहन चलाने और मारपीट की घटनाओं में करीब 300 लोगों के हाथ, पैर और कमर की हड्डियां चटक गईं, जिन पर डॉक्टरों ने प्लास्टर चढ़ाया। इसके अलावा करीब 150 लोगों के जबड़े टूट गए, जबकि लगभग 50 लोगों को मामूली चोटें आईं। बृहस्पतिवार को भी ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी फुल रही।

कार्रवाई की दी गई थी चेतावनी

होली पर शराब पीकर तेज रफ्तार में गाड़ी न चलाने की अपील प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं की ओर से की जाती है। साथ ही ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी जाती है, लेकिन इसका खास असर नहीं दिखा।

वाराणसी के साथ ही गाजीपुर, मऊ, चंदौली, जौनपुर सहित आसपास के जिलों और बिहार के औरंगाबाद, सासाराम, भभुआ, डेहरी-ऑन-सोन आदि जगहों से होलिका दहन से लेकर होली तक (2 से 4 मार्च) तीन दिनों में 500 से अधिक लोग अलग-अलग कारणों से चोटिल होकर बीएचयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचे।

किसी के पैर में चोट लगी तो कोई हाथ में फ्रैक्चर की समस्या लेकर पहुंचा। कई लोगों के दोनों पैरों में फ्रैक्चर हो गया, जबकि कुछ के हाथों में गहरी चोटें आईं। कमर में चोट लगने की समस्या लेकर पहुंचे लोगों की जांच में रीढ़ की हड्डी टूटने की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने जांच के बाद कई मरीजों को सर्जरी की सलाह दी है। इधर, इमरजेंसी फुल होने के कारण वार्ड में बेड भर जाने के बाद मरीजों का स्ट्रेचर पर इलाज करना पड़ा।

भरी रहीं सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी : होली पर तेज रफ्तार वाहन चलाने और मारपीट की घटनाओं के चलते ट्रॉमा सेंटर में 500 घायलों के पहुंचने के अलावा जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की इमरजेंसी भी मरीजों से भरी रही। 3 और 4 मार्च को दो दिनों में 100 से अधिक लोग इलाज के लिए पहुंचे। मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा की इमरजेंसी में दो दिनों में 20 से अधिक मरीज आए।

बिहार से बनारस तक घायलों को लेकर दौड़ती रहीं एंबुलेंस
सड़क हादसों और मारपीट में घायलों को तुरंत बेहतर इलाज मिल सके, इसके लिए बिहार से लेकर वाराणसी तक सरकारी और निजी एंबुलेंस दौड़ती रहीं। कई लोग निजी वाहनों से भी इलाज के लिए पहुंचे। बिहार के सासाराम, भभुआ, मोहनिया, कैमूर, कुदरा और औरंगाबाद आदि जगहों से ही करीब 100 घायल एंबुलेंस से बीएचयू ट्रॉमा सेंटर लाए गए। वाराणसी में 108 एंबुलेंस के जिला प्रभारी विकास तिवारी ने बताया कि 3 और 4 मार्च को दो दिनों में 120 से अधिक घायलों को सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से ट्रॉमा सेंटर तक पहुंचाया गया।

होली को देखते हुए इमरजेंसी में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की विशेष टीम तैनात की गई थी। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की जरूरी जांच और सर्जरी की गई। सड़क हादसों में आसपास के जिलों और बिहार से कई मरीज गंभीर हालत में पहुंचे हैं। सभी का इलाज जारी है और डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है। – प्रो. सौरभ सिंह, प्रभारी, ट्रॉमा सेंटर