May 19, 2024

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पान मसाला कारोबार पर कसेगा शिकंजा, हर पैकिंग का करना होगा ऑनलाइन पंजीकरण, पढ़ें बदल रहे हैं कौन से नियम

एक अप्रैल से आयकर, जीएसटी से जुड़े कई नियमों में बदलाव होने जा रहा है। पान मसाला कारोबार में कर चोरी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जा रही है। हर पैकिंग मशीन का ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। बिजली की खपत हर महीने जीएसटी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। रिटर्न भी दाखिल करने होंगे।

पान मसाला, तंबाकू, तंबाकू के सभी उत्पाद, सिगरेट, खैनी आदि कीनिर्माण इकाइयों को 30 अप्रैल 2024 तक जीएसटी विभाग में ऑनलाइन पैकेजिंग मशीनों की संख्या अपलोड करनी होगी। पैकेजिंग मशीन का मेक, उसकी निर्माता कंपनी, खरीद की तिथि, स्थान, कितने वजन के पैकेट पैक किए जाएंगे, पैकेजिंग क्षमता, एक घंटे में पैकेजिंग मशीन कितनी बिजली का उपभोग करेगी, मशीन का पंजीकरण आदि विवरण देने होंगे।

वर्तमान समय में कितनी पैकेजिंग मशीन हैं, इसकी भी घोषणा की जाएगी। मशीन की संख्या बढ़ाने का विवरण 24 घंटे के भीतर पोर्टल पर देना होगा। यदि मशीन हटाई गई है तो भी उसका विवरण 24 घंटे के अंदर देना होगा।सभी मशीनों का एक यूनिक नंबर जारी किया जाएगा। किस ब्रांड नाम का उत्पादन किया जा रहा है। उस पैकेट का कितना वजन है। उसका एचएसएन कोड क्या है और उत्पाद का विवरण दिया जाएगा।

 

बिजली उपभोग, उत्पादन भी बताना होगा
पान मसाला, तंबाकू उत्पादकों को महीने के अनुसार पूरे उत्पादन का विवरण फार्म जीएसटीएस आरएम दो में दाखिल करना होगा। उत्पादन का विवरण, बिजली का उपभोग, सोलर पॉवर से उपभोग का विवरण देना होगा। प्रमाणपत्र जीएसटी एसआरएम में दिया जाएगा। महीने की समाप्ति के बाद 10 दिन के भीतर पोर्टल पर अपलोड करना होगा। यदि निर्माण इकाई की मशीनों की उत्पादन क्षमता किसी अन्य सरकारी विभाग या एजेंसी को दी गई तब 15 दिन के भीतर जीएसटी विभाग को सूचना देनी होगी।

कारोबारियों को नए वित्तीय वर्ष से चालान की नई सीरीज शुरू करनी होगी
वरिष्ठ कर अधिवक्ता संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि जीएसटी नियमावली के तहत हर वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर जीएसटी के इनवाइस, बिल ऑफ सप्लाई एवं चालान की क्रम संख्या वित्तीय वर्ष की समाप्ति अर्थात 31 मार्च तक समाप्त हो जाती है। यदि इनवाइस मैनुअल बुक से जारी हो रही है, तब वह बिल बुक वहीं पर खत्म करनी होगी।

कारोबारी को अर्थदंड देना पड़ेगा
नए वित्तीय वर्ष से टैक्स इनवाइस, बिल ऑफ सप्लाई एवं चालान के क्रम संख्या 001 से शुरू करनी होगी। कारोबारी द्वारा इनवायस, बिल ऑफ सप्लाई व चालान कंप्यूटर साफ्टवेयर के माध्यम से जारी किए जा रहे हैं। तब उनके द्वारा इन सभी की कम संख्या एक अप्रैल 2024 से 001 से ही जारी करनी होगी। यदि ऐसा नहीं किया गया तब कारोबारी को अर्थदंड देना पड़ेगा।

किसी भी कारोबार का सालाना टर्नओवर पांच करोड़ से ज्यादा तो जारी होंगे ई-इनवाइस
सीए शिवम ओमर ने बताया कि यदि किसी कारोबारी का वार्षिक टर्नओवर जीएसटी लागू होने से किसी भी वित्तीय वर्ष में पांच करोड़ से अधिक हो गया है तो उन्हें एक अप्रैल 2024 से नियमित टैक्स इनवाइस के साथ-साथ ई-इनवायस भी जारी करनी होगी। यह ई-इनवायस करयोग्य वस्तुओं, सेवाओं निर्यात के मामले में जारी की जाएंगी। करमुक्त वस्तुओं एवं स्टॉक ट्रांसफर चालान के लिए यह ई-इनवाइस जारी नहीं की जाएंगी।

आयकरदाता ने अभी टैक्स फाइल करने का तरीका नहीं चुना है तो 31 तक चुन लें
कर अधिवक्ता आशीष गुप्ता ने बताया कि एक अप्रैल से नई कर व्यवस्था (नया टैक्स रिजीम) डिफॉल्ट कर व्यवस्था बन जाएगी। इसके मायने ये हैं कि अगर आयकरदाता ने अभी तक टैक्स फाइल करने का तरीका नहीं चुना है तो नई कर व्यवस्था के तहत टैक्स भरेंगे। 31 मार्च तक विकल्प चुनना होगा। एक अप्रैल 2023 से आयकर नियमों में बदलाव किए गए थे। नई कर व्यवस्था के तहत मूल छूट सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर तीन लाख कर दी गई थी। इसके अतिरिक्त, आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 87A के तहत छूट को पांच लाख से बढ़ाकर सात लाख कर दिया गया। अब नई व्यवस्था के तहत सात लाख रुपये तक की कर योग्य आय वाले व्यक्तियों को कोई आयकर नहीं देना होगा।

ये भी होंगे बदलाव
  • 50 हजार की मानक कटौती जो पहले पुरानी कर व्यवस्था पर लागू थी, अब नई कर व्यवस्था में शामिल कर दी गई है।
  • पांच करोड़ रुपये से अधिक की आय पर 37 प्रतिशत का सरचार्ज लगता था। इसे घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। नई टैक्स व्यवस्था चुनने पर पांच करोड़ रुपये से अधिक की आय वाले लोगों को अब कम कर देना होगा।
  • एक अप्रैल 2023 को या उसके बाद जारी की गई जीवन बीमा पॉलिसियों से मिलने वाली मैच्योरिटी पर टैक्स लगेगा। यह टैक्स उन पॉलिसियों पर लागू होगा, जिनमें कुल प्रीमियम पांच लाख से अधिक है।

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