June 15, 2024

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जेल में फ्री में हो जाएगा इलाज, पहले उपचार फिर बेल कराएंगे- कुछ परिजन भी खर्च उठाने में असमर्थ

जिला जेल में फ्री में इलाज होता है, ऑपरेशन करा लूं फिर बाहर निकलने के बारे में सोचेंगे। इन दिनों जिला जेल में ऐसे भी मामले देखने को मिल रहे हैं। अभी हाल ही में टॉप 10 सूची में शामिल बदमाश जेल में बंद था। सूत्रों की मानें तो उसकी बेल भी हो गई थी, लेकिन उसने रिहाई के पेपर को दबवा कर पहले केजीएमयू में ऑपरेशन करवाया।

जिसमें बाकायदा 50 हजार रुपये से अधिक जेल प्रशासन के खर्च हुए। इसके बाद बेल के कागज लगाकर वह जेल से बाहर आया। इसे लेकर काफी चर्चा भी हुई।

गंभीर रोगी करा रहे इलाज

जेल से हर दिन दो से तीन बंदी जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज इलाज के लिए जाते हैं। इसमें कैंसर, हार्ट, एचआईवी, हेपेटाइटिस, पाइल्स, पथरी और मानसिक बीमारी से ग्रसित बंदी होते हैं। सूत्रों की मानें तो कई ऐसे बंदी जेल में बंद हैं जिनके मामले में पैरवी कर उन्हें बेल दिलाई जा सकती है, लेकिन गंभीर बीमारी की चपेट में आए बंदी का इलाज कराने के लिए उन्हें जेल में ही रखा जाता है।

कई बंदी के परिजन बीमारी का खर्च उठाने में भी असमर्थ होते हैं।

गालियां देता है मानसिक बीमार

जेल में बंद एक मानसिक बीमार बुजुर्ग बंदी किसी को भी देखते ही गालियां देने लगता है। उसका इलाज मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर कर रहे हैं। उसे टहलाने और पौष्टिक आहार खिलाने के लिए डॉक्टर ने सलाह दी है। सूत्रों की मानें तो बंदी के परिजन बीमारी का हवाला देकर उसकी बेल करवा सकते हैं, लेकिन वह ऐसा नहीं कर रहे हैं।

ऐसे में बंदी को टहलाने और खिलाने-पिलाने के लिए कुछ बंदी रक्षकों की डयूटी लगाई गई है। इसी तरह एक महिला बंदी जो कैंसर से पीड़ित है, उसे कीमोथेरेपी के लिए लखनऊ भेजा जाता है। उसकी बीमारी का भी खर्च उसके परिवार वाले नहीं उठा सकते हैं।

जेल में कई ऐसे बीमार हैं बंद

ये मामले तो केवल बानगी भर हैं। ऐसे ढेरों बंदी जेल में बंद हैं, जिन्हें बीमारी है। वह जेल में अपना इलाज और ऑपरेशन करवा रहे हैं। जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय ने बताया कि मरीज को हायर सेंटर मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। जहां से बीमारी की गंभीरता को देखते हुए मरीज को लखनऊ केजीएमयू और पीजीआई रेफर किया जाता है।

इसमें जो भी खर्च आता है, वह जेल प्रशासन देता है। गंभीर बीमारियों में स्वीकृति के लिए कागज आगे भेजा जाता है। इमरजेंसी में जेल स्तर पर भी रुपये खर्च कर इलाज कराया जाता है।

एक आंकड़ा
कुल बंदियों की संख्या 1978
अंडर ट्रॉयल बंदी 1597
सजायाफ्ता पुरुष 370
महिला बंदियों की संख्या 110
सजायफ्ता महिला 27
अंडर ट्रॉयल महिला बंदी 83

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