गोंडा
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में कड़ाके की ठंड और बर्फीली हवाओं ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। शनिवार को न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 16.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे सड़कें और बाजार सूने नजर आए। लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं।
रैन बसेरे और बस अड्डों पर अलाव की व्यवस्था पूरी तरह फेल साबित हो रही है। रोडवेज बस अड्डे पर जलाया जाने वाला अलाव ठंडा पड़ा रहा, क्योंकि जगह पर पानी जमा था। बस का इंतजार कर रहे यात्री ठंड से कांपते रहे। यात्री संतराम ने कहा, “दो घंटे से बैठे हैं, अलाव जलता तो कुछ राहत मिलती। सरकार सिर्फ कागजों में इंतजाम करती है।” इसी तरह सावित्री देवी ने शिकायत की कि ठंड से हाथ-पैर सुन्न हो गए हैं।
गुरुनानक चौराहे के पास रैन बसेरे के सामने अलाव में गीली लकड़ियां डाली गईं, जो धुआं छोड़ रही थीं लेकिन आग नहीं पकड़ रही थीं। ठंड से राहत की उम्मीद लेकर आए लोग निराश लौटे। केयरटेकर अमृतलाल शुक्ल ने मजबूरी जताते हुए कहा, “गीली लकड़ी ही मिलती है, मजबूरी में कभी पॉलीथीन जलानी पड़ती है।”
महिला अस्पताल में भी ठंड से बचाव के इंतजाम नाकाफी हैं। वार्डों में हीटर या ब्लोअर नहीं दिखे, जिससे प्रसव के लिए आए तीमारदार ठिठुरते नजर आए।
खेती पर मिला-जुला असर कृषि विज्ञान केंद्र गोपालग्राम के वैज्ञानिक डॉ. सुधांशु के अनुसार, मौजूदा तापमान गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद है और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि सब्जियां और फूल वाली फसलें ठंड की चपेट में हैं। किसान रामनरेश वर्मा ने बताया कि गेहूं को तो फायदा है, लेकिन आलू और तिलहन पर पाला पड़ने का खतरा बना हुआ है।
उत्तर भारत में जारी शीतलहर के बीच गोंडा सहित पूरे यूपी में घना कोहरा और ठंड का प्रकोप जारी है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक इसी तरह के हालात बने रहने की चेतावनी दी है।

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