देहरादून
उत्तराखंड की 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की 2022 में हुई बेरहमी से हत्या का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। वायरल ऑडियो क्लिप में कथित ‘वीआईपी’ के नाम उजागर होने के बाद राज्य भर में आक्रोश भड़क उठा है। तीन मुख्य आरोपियों को मई 2025 में उम्रकैद की सजा मिल चुकी है, लेकिन नए खुलासों ने सीबीआई जांच और वीआईपी की पहचान सार्वजनिक करने की मांग को तेज कर दिया है।
नया विवाद कैसे शुरू हुआ?
- जनवरी 2026 में अभिनेत्री उर्मिला सनावर (पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की पत्नी) ने सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप शेयर की, जिसमें भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम और अन्य का नाम ‘वीआईपी’ के रूप में लिया गया।
- उर्मिला से एसआईटी ने 7 घंटे पूछताछ की, जबकि दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस और AAP को गौतम को केस से जोड़ने वाली पोस्ट हटाने का आदेश दिया।
- पुलिस का दावा: पुराने चैट में упомिन किया ‘वीआईपी’ नोएडा का धर्मेंद्र कुमार उर्फ प्रधान था, कोई बड़ा नेता नहीं।
- अल्मोड़ा की दो बहनों ने राष्ट्रपति को खून से पत्र लिखा, जबकि राज्य में भाजपा नेताओं के इस्तीफे और पूर्व सैनिकों के प्रदर्शन हो रहे हैं।
आंदोलन की रणनीति
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले महिला मंच, मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति समेत विभिन्न संगठनों ने बैठक कर फैसला लिया:
- 10 जनवरी: देहरादून के गांधी पार्क से शाम को मशाल जुलूस निकाला जाएगा।
- 11 जनवरी: पूरे उत्तराखंड में प्रदेशव्यापी बंद का आह्वान। अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने भी जनता से बंद में सहयोग की अपील की।
- मांगें: सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में सीबीआई जांच, कथित वीआईपी का नाम सार्वजनिक करना, वनंतरा रिजॉर्ट में सबूत मिटाने की जांच, परिवार को दिए वादों (नौकरी और नर्सिंग कॉलेज) का पूरा होना।
महिला मंच अध्यक्ष कमला पंत ने कहा, “सरकार प्रभावशाली लोगों को बचा रही है। कोर्ट ऑर्डर और चैट में वीआईपी का जिक्र है, नाम क्यों छिपाया जा रहा? लड़ाई जारी रहेगी।” संयोजक मोहित डिमरी ने सीएम धामी के बयान को टालने वाला बताया।
सरकार और पुलिस की कार्रवाई
- सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की, श्रीनगर गढ़वाल के नर्सिंग कॉलेज का नाम अंकिता के नाम पर रखा।
- नई एसआईटी गठित, ऑडियो की जांच जारी। सीएम बोले- “कोई दोषी बचेगा नहीं, परिवार की मांगों पर कानूनी विचार कर निर्णय लेंगे।”
- प्रदर्शनकारियों ने इसे ‘कॉस्मेटिक जेस्चर’ बताया, आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी।
राजनीतिक बवाल
- कांग्रेस, UKD, लेफ्ट पार्टियां और सामाजिक संगठन सड़कों पर। देहरादून से दिल्ली तक प्रदर्शन।
- पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी सीबीआई जांच की मांग की।
- विपक्ष का आरोप: भाजपा सरकार सबूत मिटाने और कवर-अप में लगी है।
राज्य भर में तनाव बना हुआ है। प्रदर्शनकारी ‘अंकिता उत्तराखंड की बेटी है, न्याय दो’ के नारे लगा रहे हैं। 11 जनवरी का बंद सफल बनाने की तैयारियां जोरों पर हैं।
(स्रोत: तक, न्यूजलॉन्ड्री, द प्रिंट, बीबीसी, हिंदुस्तान टाइम्स और अन्य विश्वसनीय रिपोर्ट्स)

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