January 11, 2026

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उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण विभाग ने आउटसोर्सिंग के माध्यम से हुई भर्तियों की जांच का फैसला लिया है। 

 की रिपोर्ट (11 जनवरी 2026) के अनुसार, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत संचालित अभ्युदय कोचिंग में अयोग्य कोर्स कोऑर्डिनेटरों की भर्ती में घपला सामने आने के बाद विभाग ने यह बड़ा कदम उठाया है। जांच के लिए पत्र जारी कर दिया गया है, और इसमें विभाग की सभी आउटसोर्सिंग भर्तियों को शामिल किया जाएगा।

जांच का दायरा और कारण

यह फैसला अभ्युदय कोचिंग में कोर्स कोऑर्डिनेटरों की भर्ती घोटाले के बाद लिया गया, जहां कुल 69 पदों में से 48 अभ्यर्थी अयोग्य पाए गए। नियमों के अनुसार, इन पदों के लिए पीसीएस मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य था, लेकिन फर्जी दस्तावेजों और नियमों की अनदेखी से अपात्र लोगों को नियुक्त किया गया।

इस घोटाले में आउटसोर्सिंग कंपनी अवनि परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड पर FIR दर्ज की गई है (दिसंबर 2025 में गोमती नगर थाने में)। कंपनी पर साजिश, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और नियमों का उल्लंघन का आरोप है।

समाज कल्याण विभाग ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए अब पूरे विभाग में आउटसोर्सिंग भर्तियों की जांच कराने का निर्णय लिया है। जांच में मुख्य रूप से देखा जाएगा:

  • निर्धारित योग्यता (अर्हता) के अनुसार चयन हुआ या नहीं।
  • तय प्रक्रिया (दस्तावेज सत्यापन, साक्षात्कार आदि) का पालन किया गया या नहीं।

यहां अभ्युदय कोचिंग सेंटरों की कुछ तस्वीरें, जहां गरीब मेधावी छात्रों को IAS/PCS जैसी परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग दी जाती है:

जांच में शामिल प्रमुख भर्तियां

समाज कल्याण विभाग में आउटसोर्सिंग पर कुल 460 पदों की भर्ती हुई है, जिनमें शामिल हैं:

  • कंप्यूटर ऑपरेटर – 300 पद (मासिक मानदेय: ₹18,000 तक)
  • कंप्यूटर प्रोग्रामर – 10 पद (मासिक मानदेय: ₹60,000 तक)
  • मल्टी टास्क सर्विसेज (MTS)/चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी – 150 पद (मासिक मानदेय: ₹10,000 तक)

ये भर्तियां आश्रम पद्धति स्कूलों, अभ्युदय कोचिंग, छात्रवृत्ति योजना और मंडलीय कार्यालयों में की गई हैं।

पृष्ठभूमि और आगे की उम्मीद

यह मामला मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा है, जो 2021 से गरीब छात्रों को मुफ्त कोचिंग प्रदान करती है और अब तक सैकड़ों सफलताएं हासिल कर चुकी है। घोटाले के बाद विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।

समाज कल्याण विभाग की यह जांच उत्तर प्रदेश में आउटसोर्सिंग भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि जांच में अनियमितताएं पाई गईं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की उम्मीद है।

यदि इस जांच पर कोई नई अपडेट या अधिक विवरण चाहिए, तो बताएं!