January 11, 2026

TNC Live TV

No.1 News Channel Of UP

वाराणसी में सिंथेटिक मांझा/नायलॉन धागे पर सख्ती: डीएम, सीपी और यूपीपीसीबी को कानूनी नोटिस

 वाराणसी के अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के 2017 के आदेशों के उल्लंघन को लेकर जिलाधिकारी (डीएम), पुलिस आयुक्त (सीपी) और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के क्षेत्रीय अधिकारियों को कानूनी नोटिस जारी किया है। नोटिस एनजीटी अधिनियम, 2010 की धारा 30(1) के तहत भेजा गया है, जिसमें प्रभावी कार्रवाई न करने पर आपराधिक मुकदमा दायर करने की चेतावनी दी गई है।

NGT का 2017 का ऐतिहासिक आदेश

11 जुलाई 2017 को खालिद अशरफ एवं अन्य बनाम भारत संघ मामले में NGT ने पूरे देश में सिंथेटिक मांझा, नायलॉन धागा और किसी भी गैर-जैव-विघटनीय (non-biodegradable) सिंथेटिक धागे के निर्माण, बिक्री, भंडारण, खरीद और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। यह आदेश PETA, खालिद अशरफ आदि की याचिका पर आया, जिसमें बताया गया कि ऐसे धागे पक्षियों, जानवरों और इंसानों के लिए घातक हैं – हर साल कई मौतें और गंभीर चोटें होती हैं।

यहां सिंथेटिक मांझे के खतरों को दिखाती कुछ तस्वीरें – पक्षी और जानवरों पर इसका प्रभाव:

वाराणसी में स्थिति और नोटिस की वजह

अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने नोटिस में कहा कि NGT के आदेश के बावजूद वाराणसी में सिंथेटिक/नायलॉन मांझा और कांच/धातु से लेपित सिंथेटिक धागे धड़ल्ले से बिक रहे हैं, भंडारित किए जा रहे हैं और इस्तेमाल हो रहे हैं। केवल सूती धागा (बिना किसी सिंथेटिक लेप के) का उपयोग ही अनुमति है, लेकिन नियमों की अनदेखी हो रही है।

इससे:

  • पक्षी और जानवर लगातार घायल हो रहे हैं या मर रहे हैं।
  • इंसानों को गंभीर चोटें (गले कटना, बिजली का झटका आदि) लग रही हैं।
  • पुलिस और प्रदूषण बोर्ड दुकानदारों से मिलीभगत कर रहे हैं या लापरवाही बरत रहे हैं।

यहां सूती vs सिंथेटिक मांझे की तुलना और बाजार में बिकने वाले प्रतिबंधित धागों की तस्वीरें:

आगे की चेतावनी

नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि अगर डीएम, सीपी और यूपीपीसीबी अधिकारी अपने कर्तव्य का पालन नहीं करते, तो मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एनजीटी अधिनियम की धारा 30 के तहत सभी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दायर किया जाएगा।

यह मामला मकर संक्रांति और अन्य पतंगबाजी के मौकों से पहले उठा है, जब सिंथेटिक मांझे की बिक्री बढ़ जाती है। पूरे देश में कई जिलों में इसी तरह के प्रतिबंध और कार्रवाई हो रही हैं, लेकिन वाराणसी में अभी तक प्रभावी अमल नहीं हुआ।

अधिवक्ता सौरभ तिवारी की यह पहल पर्यावरण, वन्यजीव और मानव सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। यदि अधिकारी कार्रवाई करते हैं, तो शहर में प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और उपयोग पर रोक लग सकती है।

यदि इस मामले पर कोई नई अपडेट या अधिक जानकारी चाहिए, तो बताएं!