February 20, 2026

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पश्चिमी देशों के लोगों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था से किया खिलवाड़

Westerners have messed with India's education system
लखनऊ। पश्चिमी देशों के लोगों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ किया और अपनी व्यवस्था हम पर थोप दी। इसका उद्देश्य था कि उन्हें काम करने के लिए काले अंग्रेज भी मिल सकें। अंग्रेजों ने जिस तरह हमारी शिक्षा व्यवस्था को बिगाड़ा, उसे ठीक करना जरूरी है। ये बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहीं। वे बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित शोधार्थी संवाद में शिक्षकों व शोधार्थियों को संबोधित कर रहे थे।

भागवत ने कहा कि पश्चिमी देशों की सोच है कि बलशाली बनकर खुद जियो और बाकी को छोड़ दो, जो बाधक बने, उन्हें मिटा दो। अमेरिका और चीन यही काम कर रहे हैं। आज दुनिया की समस्याओं के प्रश्नों का जवाब भारत के पास है। विश्व गुरु बनना है तो सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली बनना होगा। दुनिया तभी मानती है जब सत्य के पीछे शक्ति हो।
भागवत ने कहा कि भारत की दिशा और दशा बदलने में शोध की बड़ी भूमिका है। सत्यपरक बातें सामने आनी चाहिए। शोधार्थियों से कहा कि जो शोध करें उसे तन-मन-धन और निःस्वार्थ भाव से देश के लिए करें। उन्होंने कहा कि संघ को लेकर बहुत दुष्प्रचार होता है। शोधार्थियों को सत्य सामने लाना चाहिए।
डॉ. भागवत ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य मूलभूत आवश्यकता है। इन्हें व्यवसाय नहीं बना सकते हैं। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था हर आदमी की पहुंच में होनी चाहिए। संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि पर्यावरण के प्रति हमें मित्र भाव से जीवन जीना चाहिए। पेड़ लगाना, पानी बचाना, एकल प्लास्टिक का इस्तेमाल न करना जैसे काम पर्यावरण संरक्षण में सहायक हो सकते हैं। पर्यावरण संरक्षण में आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल करना चाहिए।
भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का काम भारत को परम वैभव संपन्न बनाना है। उन्होंने कहाकि मैं और मेरा परिवार ही सबकुछ है, यह न सोचकर पूरे देश के लिए सोचना होगा। संघ समाज की एकता और गुणवत्ता की चिंता करता है। संघ को समझना है तो इसके अंदर आकर देखिये। संघ को पढ़कर नहीं समझा जा सकता है। संघ का काम संपूर्ण हिन्दू समाज को संगठित करना है। संघ किसी के विरोध में नहीं है। इसे लोकप्रियता, प्रभाव और शक्ति नहीं चाहिए।
वैश्वीकरण पर भागवत ने कहा कि यह बहुत बड़ी चुनौती नहीं है। आज वैश्वीकरण का मतलब बाजारीकरण से है, जो खतरनाक है। हम वसुधैव कुटुंबकम की बात करते हैं। यानी पूरे विश्व को अपना परिवार मानते हैं। जब तक सब सुखी नहीं होंगे, एक व्यक्ति सुखी नहीं हो सकता है। इस कारण हमारा जीवन संयमित होना चाहिए, न कि उपभोगवादी।
भागवत ने कहा कि धर्म का शाश्वत स्वरूप हमेशा प्रासंगिक है। सृष्टि जिन नियमों से चलती है, वह धर्म है। धूल का एक भी कण धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता है। धर्म सबको सुख पहुंचाता है। हमारी सभी बातों में धर्म लागू है। आचरण धर्म, देश, काल के अनुसार बदलता है। धर्म बताता है कि हमें सबके साथ जीना है।