
बुधवार सुबह एक चिकित्सक पार्किंग में कार खड़ी करने पहुंचे तो वहां मौजूद कर्मचारी ने 25 की जगह 100 रुपये मांगे। चिकित्सक ने आपत्ति की तो कर्मचारी ने कहा कि यह प्राइवेट पार्किंग है और 100 रुपये ही देने होंगे। उसने टोकन पर खुद ही 100 रुपये लिख दिया और उसी पर साइन बनाकर उसे छिपा भी दिया। यह कर्मचारी अन्य वाहनों से भी इसी तरह 100 रुपये वसूल रहा था।
खास यह है कि टोकन नगर निगम का था, मगर उस पर छपी पार्किंग रेट वाली लाइन को काले पेन से मिटाया गया था। चिकित्सक उस वक्त 100 रुपये देकर चले गए। बाद में उन्होंने नगर निगम से जानकारी की तो पता चला कि अभी 25 रुपये ही शुल्क है। शिकायत पर अपर नगर आयुक्त डाॅ. अरविंद राव ने पार्किंग प्रभारी और जोनल अधिकारी को मौके पर जाकर जांच करने और दोषी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए।
जानकारों ने बताया अमीनाबाद भूमिगत पार्किंग में चार पहिया की तरह ही दो पहिया वाहन वालों से 10 की जगह 50 रुपये वसूल किए जा रहे हैं। इस पार्किंग में करीब 700 गाड़ियां खड़ी हो सकती हैं। इस हिसाब से हर महीने करीब 10 लाख रुपये से अधिक की अवैध वसूली की जा रही है। इसमें नगर निगम के पार्किंग बाबू से लेकर जोन के अधिकारियों तक की भूमिका संदेह के घेरे में है।
अवैध वसूली के लिए हटवा दिया रेट बोर्ड
पार्किंग स्थल पर शुल्क का कोई रेट बोर्ड भी नहीं लगा है। रेट बोर्ड लगा हो तो लोगों को पता चल जाएगा कि शुल्क कितना है। जोनल अधिकारी ओम प्रकाश ने बताया कि रेट बोर्ड लगवाया गया था, हो सकता है किसी ने हटा दिया हो। पार्किंग का संचालन नगर निगम कर्मचारी ही कर रहे हैं। किसने 100 रुपये लिए, यह पता किया जा रहा है और दोषी पर कार्रवाई होगी।
चार महीने पहले का मामला दबा दिया गया था
करीब चार महीने पहले भी अमीनाबाद पार्किंग में 25 की जगह 100 रुपये वसूले जाने का मामला सामने आया था। उस समय पार्किंग का संचालन ठेके पर हो रहा था। मामला सामने आने पर नगर निगम ने जांच कर कार्रवाई का दावा किया था, मगर बाद में मिलीभगत से मामले को दबा दिया गया। सूत्रों का कहना है कि पार्किंग विभाग देखने वाले अधिकारी-कर्मचारी ठेकेदार से मिले हैं। इस कारण जो शिकायत आती है उसे दबा देते हैं। इससे अवैध वसूली करने वालों के हौसले बुलंद हैं।

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