
राष्ट्रीय लोक दल यानी रालोद के प्रमुख जयंत चौधरी ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, ‘जो हलवाई और ततैये का किस्सा सुना रहे हैं, उन्हें मैं बता दूं कि मुझे मीठे का कोई शौक नहीं।’ इस पोस्ट के सामने आते ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और राजनीतिक गलियारों में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं।
पोस्ट के सियासी मायने तलाशे जा रहे
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जयंत चौधरी का यह बयान पलटवार है। ‘हलवाई और ततैया’ की कहानी को आमतौर पर सत्ता, लाभ और उसके आसपास मंडराने वाले लोगों के संदर्भ में देखा जाता है। ऐसे में उनके ‘मीठ का शौक नहीं’ वाले बयान को सत्ता या किसी राजनीतिक लाभ की चाहत से दूरी बनाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
गठबंधन और चुनावी रणनीति से जोड़कर भी देख रहे लोग
जयंत चौधरी के इस बयान को आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 और वर्तमान राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान उनकी राजनीतिक स्वतंत्रता और सिद्धांत आधारित राजनीति का संदेश देने की कोशिश भी हो सकता है
समर्थकों और विरोधियों के बीच चर्चा तेज
इस पोस्ट के बाद जहां उनके समर्थक इसे मजबूत और स्पष्ट संदेश बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल और राजनीतिक पर्यवेक्षक इसके पीछे छिपे संकेतों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल जयंत चौधरी के इस बयान ने यूपी की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।
